Bharat Express DD Free Dish

आधार कार्ड पर ‘सुप्रीम’ सुनवाई: क्या अब मुश्किल होगा बनवाना? प्रक्रिया में बड़े बदलाव की याचिका पर कोर्ट ने सरकार को सौंपा जिम्मा

सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड की प्रक्रिया में बड़े बदलाव की मांग वाली याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय को केंद्र सरकार से संपर्क करने का निर्देश दिया है. याचिका में मांग की गई थी कि घुसपैठ को रोकने के लिए नया आधार केवल छोटे बच्चों के लिए ही बनाया जाना चाहिए.

SC on Aadhaar Card Process Court asks petitioner to approach Centre for stricter rules

AI IMAGE

Supreme Court Aadhaar Verdict: गोपाल कृष्ण/नई दिल्ली: आज के दौर में आधार कार्ड हमारी जिंदगी का वैसा ही हिस्सा बन चुका है जैसे मोबाइल फोन. बैंक खाता खुलवाना हो या सिम कार्ड लेना, हर जगह आधार सबसे पहले मांगा जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस आधार को हम अपनी पहचान का सबसे बड़ा सबूत मानते हैं, उसे बनवाना इतना आसान क्यों है? इसी सवाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक दिलचस्प कानूनी जंग चल रही थी, जिस पर अदालत ने अब अपना रुख साफ कर दिया है.

‘सरकार के पास जाइए’: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने देश में आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को सख्त बनाने वाली एक जनहित याचिका का निपटारा कर दिया है. अदालत ने याचिकाकर्ता, मशहूर अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय से कहा है कि वे अपनी चिंताओं और सुझावों को लेकर केंद्र सरकार के पास जाएं और उन्हें एक औपचारिक ज्ञापन (Representation) सौंपें. कोर्ट का मानना है कि इस तरह के नीतिगत फैसले लेना संसद और सरकार का काम है.

क्या हैं याचिकाकर्ता की चिंताएं?

सुनवाई के दौरान अश्विनी उपाध्याय ने कुछ ऐसे आंकड़े पेश किए जो किसी को भी चौंका सकते हैं. उन्होंने बताया कि देश में अब तक लगभग 144 करोड़ आधार कार्ड जारी किए जा चुके हैं और करीब-करीब हर वयस्क भारतीय के पास अपना आधार है. लेकिन उनकी असली चिंता सुरक्षा को लेकर है.

उपाध्याय की दलील थी कि मौजूदा सिस्टम में आधार बनवाना इतना आसान है कि कोई भी फर्जी दस्तावेजों के जरिए इसे हासिल कर सकता है. उन्होंने मुंबई में मिले फर्जी दस्तावेजों के अंबार का उदाहरण देते हुए कहा कि ये ढीली व्यवस्था घुसपैठियों के लिए भारत में पैर जमाने का एक आसान रास्ता बन गई है. उनका कहना है कि एक बार आधार बन जाने के बाद घुसपैठिये इसी के दम पर राशन कार्ड और वोटर आईडी भी बनवा लेते हैं, जो देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है.

सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: ‘अपराधी तो रास्ते निकालते रहेंगे’

जब ये दलीलें पेश की जा रही थीं, तब सीजेआई (CJI) ने एक बहुत ही व्यवहारिक टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि दस्तावेजों के गलत इस्तेमाल की समस्या सिर्फ आधार तक सीमित नहीं है. चाहे वो पासपोर्ट हो या कॉलेज की डिग्रियां, जालसाज हर जगह सेंध लगाने की कोशिश करते हैं और अपराधी ऐसे नए-नए तरीके अपनाते ही रहेंगे. इसलिए, इस मुद्दे को सरकार के स्तर पर सुलझाना ज्यादा बेहतर है.

क्या सुझाव दिए गए थे?

याचिका में आधार सिस्टम को ‘फूलप्रूफ’ बनाने के लिए कुछ कड़े कदम उठाने की मांग की गई थी.

  • उम्र की पाबंदी: नया आधार कार्ड केवल 6 साल तक के बच्चों के लिए बने.
  • सख्त नियम: किशोरों और वयस्कों के लिए आधार बनवाने की प्रक्रिया को बहुत कठिन किया जाए.
  • स्पष्ट चेतावनी: आधार केंद्रों पर बड़े बोर्ड हों जो ये साफ करें कि आधार सिर्फ एक ‘पहचान पत्र’ है, नागरिकता का प्रमाण नहीं.
  • कठोर सजा: फर्जी दस्तावेजों से आधार बनाने वालों को ऐसी सजा मिले जो मिसाल बने.

इतिहास: कारगिल युद्ध से जुड़ी हैं जड़ें

आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में पहचान पत्र की ये कवायद कारगिल युद्ध के बाद शुरू हुई थी. साल 2000 में एक कमेटी ने सुझाव दिया था कि सीमावर्ती इलाकों के लोगों को पहले आईडी कार्ड दिए जाएं और फिर इसे पूरे देश में लागू किया जाए. इसी सोच के साथ जनवरी 2009 में UIDAI (आधार) का जन्म हुआ था.

ये भी पढ़ें: जेपी एसोसिएट्स के ‘बॉस’ बनेंगे अडाणी: NCLAT ने वेदांता की अर्जी की रद्द, 14,535 करोड़ के प्लान पर लगी मुहर

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read