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फ्लैट खरीदारों को बड़ी राहत; सुप्रीम कोर्ट ने कहा- एग्रीमेंट में मध्यस्थता की शर्त होने पर भी कंज्यूमर कोर्ट जा सकते हैं ग्राहक

सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी समझौते में आर्बिट्रेशन क्लॉज होने मात्र से उपभोक्ता मंच का अधिकार क्षेत्र खत्म नही हो जाता है.

SUPREME COURT

सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी समझौते में आर्बिट्रेशन क्लॉज होने मात्र से उपभोक्ता मंच का अधिकार क्षेत्र खत्म नही हो जाता है. कोर्ट ने कहा कि यदि उपभोक्ता सेवा की कमी की शिकायत लेकर उपभोक्ता फोरम के दरवाजा खटखटाता है तो उसे केवल आर्बिट्रेशन क्लॉज के आधार पर वहां से बाहर नहीं किया जा सकता.

जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह फैसला दिया है. कोर्ट ने जिला उपभोक्ता मंच को निर्देश दिया कि वह मामले का गुण-दोष के आधार पर निपटारा करें तथा संभव हो तो एक वर्ष के भीतर फैसला करे. अदालत ने कहा कि एनसीडीआरसी, राज्य आयोग और जिला उपभोक्ता मंच के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें फ्लैट के कब्जे में देरी से जुड़े विवाद को उपभोक्ता मंच हटाकर मध्यस्थता के लिए भेज दिया था. यह मामला एक फ्लैट खरीदार से जुड़ा था, जिसने बिल्डर द्वारा समय पर कब्जा नहीं देने को लेकर उपभोक्ता शिकायत दायर किया था.

हालांकि फ्लैट खरीद समझौते में आर्बिट्रेशन क्लॉज मौजूद था, इसलिए जिला मंच ने शिकायत स्वीकार करने और नोटिस जारी करने के बावजूद मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया. इस फैसले को राज्य आयोग और बाद में एनसीडीआरसी ने भी बरकरार रखा था. सुप्रीम कोर्ट ने इसे गलत ठहराया है.

निजी अनुबंध वैधानिक अधिकारों को खत्म नहीं कर सकते

कोर्ट ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 उपभोक्ताओं को विवाद निपटारे के लिए एक विशेष वैधानिक मंच से वंचित नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि Emaar MGF Land Ltd बनाम आफताब सिंह (2019) के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि संसद ने उपभोक्ता कानून के तहत उपलब्ध उपायों को अन्य कानूनी उपायों के अतिरिक्त बनाया है. इसलिए किसी निजी अनुबंध में मौजूद आर्बिट्रेशन क्लॉज वैधानिक अधिकारों को खत्म नहीं कर सकता.

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 12(4) के प्रावधान के अनुसार एक बार शिकायत स्वीकार हो जाने के बाद उसे किसी अन्य अदालत, ट्रिब्यूनल या प्राधिकरण को स्थानांतरित नहीं किया जा सकता. ऐसे में केवल आर्बिट्रेशन क्लॉज के आधार पर भमले को उपभोक्ता मंच से बाहर भेजना कानून के विपरीत है.

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