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कानून के छात्रों के आचरण पर बीसीआई को कार्रवाई करने का अधिकार नहीं- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मिहिरा सूद सहित अन्य छात्रों की याचिका पर बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के पास कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के आचरण के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है.

ओडिशा में डीजीपी नियुक्ति में नियमों की अनदेखी के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई.

(सुप्रीम कोर्ट)

सुप्रीम कोर्ट ने मिहिरा सूद सहित अन्य की ओर से दायर याचिका पर बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पास कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के आचरण पर बीसीआई को कार्रवाई करने का अधिकार नही है.

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब तक कोई कानून के छात्र अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत नहीं हो जाता, तब तक उसके आचरण का मामला संबंधित विश्वविद्यालय या शैक्षणिक संस्थान के अधिकार क्षेत्र में नही आता है.

यह मामला हैदराबाद स्थित नालसार के 2026 बैच के छात्रों से जुड़ा था. इन छात्रों ने सीजेआई सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने के खिलाफ विश्वविद्यालय को पत्र लिखा था. इसके बाद बीसीआई ने छात्रों के अधिवक्ता के रूप में नामांकन पर रोक लगाने को लेकर दिए गए निर्देशों से जुड़ा था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया.

अदालत ने कहा कि एडवोकेट एक्ट 1961 बीसीआई को कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की कोई स्पष्ट या निहित शक्ति देता है. कोर्ट ने कहा छात्रों के शैक्षणिक और अनुशासन संबंधी मामलों पर फैसला लेने का अधिकार विश्वविद्यालय या संबंधित शिक्षण संस्थान का है.

अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण के बाद शुरू होती है BCI की भूमिका- CJI सूर्यकांत

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि बीसीआई की भूमिका उस समय शुरू होती है, जब कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद कोई व्यक्ति अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत होता है. कोर्ट ने साफ किया है कि जिन छात्रों की बात हो रही है, उन्होंने अभी अधिवक्ता के तौर पर नामांकन नहीं कराया था. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि किसी छात्र को पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाए या नही, यह विश्वविद्यालय का विषय है. बीसीआई भविष्य में नामांकन को लेकर किसी छात्र पर पहले से शर्त या रोक नहीं लगा सकता.

कोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा 13 अगस्त 2026को जो निर्देश दिया गया था वह बिना अधिकार क्षेत्र के बिना जारी किया गया था. चूंकि बीसीआई पहले ही नालसार के 2026 बैच के छात्रों के खिलाफ जारी अधिसूचना वापस ले चुका था, इसलिए कोर्ट इस मामले को बंद करने का निर्देश जारी करता है.

इससे पहले सीजेआई सूर्यकांत ने बीसीआई की कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि छात्रों और उनके बीच हुआ संवाद एक अलग विषय है और बीसीआई को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है.

यह भी पढ़ें-‘हर मामला हमारे पास न लाएं’: वकीलों पर हुए हमले की CBI जांच वाली अर्जी सुप्रीम कोर्ट से खारिज

-भारत एक्सप्रेस



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