सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर दायर याचिका पर हिंदू पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने ढांचे में किसी तरह के बदलाव पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है.
कोर्ट ने कहा भोजशाला परिसर के पास जगह मुहैया कराने का आदेश दिया है ताकि शुक्रवार को 1 बजे से तीन बजे के बीच नमाज अदा कर सके. कोर्ट तीन हफ्ते बाद याचिका पर अगली सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि कोई अंतरिम व्यवस्था राज्य सरकार की ओर से की जाए. ताकि दोनों पक्षों को कोई परेशानी नहीं हो और नमाज भी अदा की जा सके.
मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हुफैजा अहमदी ने कहा कि मुझे अंतरिम राहत मिलनी चाहिए. क्योंकि इस मामले में आदेश को लागू करने में बहुत जल्दबाजी की गई. हुफैजा ने कहा कि सन 1500 से जो यथास्थिति बनी हुई थी, वो खत्म की गई, जिसमें सीधे तौर पर एक तरफा किया है. वही वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि एक दिन के भीतर संस्कृति मंत्रालय द्वारा तय कर दिया गया कि एक समुदाय का प्रवेश प्रतिबंध रहेगा. जस्टिस बागची ने कहा कि क्या आपको लगता है कि इस तरह की दलीलों से हम फैसले पर रोक लगाने का निर्णय तत्काल ले लेंगे. वही केंद्र और राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने मुस्लिम पक्ष की ओर से रोक या यथास्थिति की मांग का विरोध किया है. सीजेआई सूर्यकांत ने वरिष्ठ वकीलों से कहा कि बहुत संवेदशील मामला है, दलील में इस्तेमाल शब्दों का ख्याल रखने को कहा है. इसको लेकर तीन याचिकाएं दायर की चुकी है.
भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष की नई याचिका
इससे पहले हिंदू पक्ष की ओर से कैविएट दायर की जा चुकी है, ताकि बिना पक्ष सुने स्टे न मिल सके. इससे पहले शहर के काजी, फिर कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी और अब जिब्रान अंसारी ने दायर की है. हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना था. साथ ही कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने यह फैसला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट के आधार पर सुनाया था. भोजशाला मामले में अदालत के फैसले में परिसर को देवी वाग्देवी के मंदिर के रूप में मान्यता दी गई है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मस्जिद पक्ष यदि सरकार को आवेदन देता है तो उसे अलग जमीन उपलब्ध कराई जाएगी. सरकार इंग्लैंड से वाग्देवी की प्रतिमा लाने का प्रयास करें. रिपोर्ट में भोजशाला परिसर के वो 188 मूल आधार स्तंभ जिनमें 106 मुख्य स्तंभ और 8 अर्द्धस्तंभों फैसला का मुख्य आधार बने. जिन पर हिंदू धर्म से जुड़े प्रतीक, देवी देवताओं की आकृतियों और मंदिर शैली कीनक्काशी मिलने का दावा किया गया.
इन्ही तथ्यों को आधार मानते हुए हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है. हिंदू समुदाय भोजशाला को. देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि 11 वीं सदी का यह स्मारक कमाल मौला मस्जिद है. अदालत के आदेश पर हुए सर्वे में भी यहां मंदिर होने की पुष्टि हुई है. ऐसे में एएसआई का आदेश वैसे ही अपने आप में गलत है, लेकिन बसंत पंचमी का दिन तो मां सरस्वती की पूजा अर्चना का दिन है. उस दिन हवन, पूजा और महाआरती जैसे जरूरी धार्मिक कर्म संकल्प से पूर्णाहुति तक बिना किसी व्यवधान के होने चाहिए. ऐसे में उस दिन नमाज की इजाजत नहीं होनी चाहिए.
धार में साल 2006, 2012 और 2016 में शुक्रवार को वसंत पंचमी आई तो विवाद की स्थिति बनी. वसंत पंचमी पर हिंदू पक्ष को पूजा जबकि शुक्रवार होने से मुस्लिमों को नमाज की अनुमति है. ऐसे में वसंत पंचमी शुक्रवार को आने पर समझाइश के बाद पूजा और नमाज दोनों करवाए जाते है. शुक्रवार के दिन लगभग तीन हजार मुस्लिम नमाज अदा करते है.
-भारत एक्सप्रेस
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