सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने हाल ही में कोर्ट की रजिस्ट्री में सामने आए कुछ मामलों पर गहरी चिंता जताई है. उनका कहना है कि ऐसा लगता है मानो कोर्ट की आंतरिक प्रक्रियाओं में कुछ गंभीर कमियां हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.
CJI सूर्यकांत ने विशेष रूप से एक घटना का जिक्र किया, जिसमें एक याचिका, जिसे पहले तीन जजों की बेंच ने खारिज कर दिया था. बाद में अचानक दूसरी बेंच के सामने सूचीबद्ध कर दी गई. उन्होंने इसे कोर्ट की लिस्टिंग प्रक्रियाओं का उल्लंघन बताया और कहा कि यह गंभीर रूप से चिंता का विषय है.
CJI ने कहा,
“मैं यह जानकर दंग रह गया कि एक याचिका, जिसे तीन जजों की बेंच ने खारिज कर दिया था, बाद में दूसरी बेंच के सामने लिस्ट कर दी गई.”
रजिस्ट्री के कर्मचारियों पर जताई चिंता
सिर्फ याचिकाओं की लिस्टिंग ही नहीं, बल्कि रजिस्ट्री में काम करने वाले कुछ अधिकारियों के रवैये को लेकर भी CJI ने आपत्ति जताई. उन्होंने बताया कि रजिस्ट्री में कई ऐसे अधिकारी हैं जो पिछले 20-30 सालों से सेवा में हैं. इनमें से कुछ का मानना है कि वे न्यायिक निगरानी या प्रशासनिक सुधारों से ऊपर हैं. CJI सूर्यकांत ने इसे गंभीर खतरे के रूप में देखा है.
उन्होंने साफ कहा कि अगर इस स्थिति को उन्होंने अपने कार्यकाल खत्म होने से पहले नहीं सुधारा, तो यह उनके कर्तव्य की विफलता होगी. उन्होंने सुधार के लिए कड़े कदम उठाने का संकल्प भी लिया.
जांच और सुधार की दिशा में कदम
सीजेआई सूर्यकांत ने संकेत दिया कि रजिस्ट्री में गहन जांच की जाएगी. उनका कहना है कि कुछ अधिकारियों को लगता है कि जज यहां केवल अस्थायी हैं, जबकि वे स्वयं स्थायी हैं. इसी कारण से कई मामलों में चीजें अपने मनमाने तरीके से होती आई हैं. सीजेआई के इस बयान से साफ है कि सुप्रीम कोर्ट में प्रशासनिक सुधारों की जरूरत है. कोर्ट की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ये कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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