डिजिटल आरेस्ट को लेकर लिए गए स्वतः संज्ञान पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई, केंद्र सरकार साइबर क्राइम अंबाला, हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि लोगों की जीवन भर की बचत से ठगी करने वाले बड़े सिंडिकेट का पता लगाने की जरूरत बताई है. कोर्ट ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट में विभिन्न फर्जी कार्यवाहियों और सीबीआई, ईडी जांच के झूठे दावे सामने आए है.
कोर्ट ने लिया संज्ञान
दस्तावेजों की जालसाजी और इस अदालत तथा हाई कोर्ट के नाम, मुहर और न्यायिक प्राधिकरण का बेशर्मी से आपराधिक दुरुपयोग गंभीर चिंता का विषय है. कोर्ट ने कहा कि न्यायाधीशों के फर्जी हस्ताक्षरों वाले न्यायिक आदेश न्यायपालिका पर जन विश्वास प्रणाली की नींव पर प्रहार करते हैं. कोर्ट ने कहा कि यह मामला कोई अकेला मामला नही है. उन्होंने कहा कि मीडिया में इस तरह की खबरे कई बार छपी है. सुप्रीम कोर्ट ने अंबाला में बुजुर्ग महिला से फर्जी आदेश दिखाकर 1करोड़ 5 लाख रुपये की ठगी की बात सामने आने के बाद स्वतः संज्ञान लिया था.
व्हाट्सएप पर भेजा गया झूठा कानूनी नोटिस
दरअसल सितंबर में हरियाणा रोडवेज विभाग की रिटायर्ड ऑडिटर शशिबाला सचदेवा और उनके पति से फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने करीब 1 करोड़ 5 लाख रुपये की ठगी कर ली थी. इतना ही नही पीड़ित महिला और उनके पति को 13 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया था. उस दौरान मानसिक प्रताड़ना और जान से मारने तक कि धमकी दी गई. जिसकी शिकायत पीड़िता ने पुलिस से की थी, उन्होंने पुलिस को बताया था कि 3 सितंबर को उनके व्हाट्सएप नंबर पर एक महिला ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी ऑथोरिटी से बताते हुए संपर्क किया और कहा कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आ रहा है. जिसके बाद कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.
सीबीआई ने भी कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में सोशल मीडिया के जरिए ऑनलाइन निवेश योजनाओं के नाम पर लाखों लोगों से ठगी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है. बता दें कि साइबर ठगों ने हाल ही में सीजेआई बी आर गवई के नाम पर करोड़ों की ठगी की है. ठगों ने नासिक के दो बुजुर्गों से अलग-अलग घटनाओं में सीजेआई की अदालत में ऑनलाइन पेशी की धमकी देकर डिजिटल आरेस्ट करने और 6.72 करोड़ रुपये ठगने का मामला सामने आया है.
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