डिजिटल आरेस्ट को लेकर लिए गए स्वतः संज्ञान पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने 72 वर्षीय महिला वकील से डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगे गए 3.29 करोड़ रुपए के मामले में गिरफ्तार आरोपियों को जमानत नही देने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि संबंधित अदालतें आरोपियों को रिहाई का आदेश जारी न करें. कोर्ट ने अपने आदेश में.स्पष्ट किया है कि कोई भी अदालत आरोपी विजय खन्ना और अन्य सह- अभियुक्तों को रिहाई नही देगी.
जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश दिया हैं. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ऐसे मामलों से.सख्ती से निपटा जाना चाहिए ताकि सही संदेश जाए. कोर्ट ने कहा कि असमान्य घटना के लिए असमान्य हस्तक्षेप की जरूरत होती है. 24 नवंबर को कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन नायर ने कोर्ट को बताया कि ठगी के शिकार महिला वकील की जिंदगी भर की जमा पूंजी चली गई है. घटना की एफआईआर के बाद जो आरोपी गिरफ्तार हुए थे वे विधायी जमानत पर छूट जाएंगे.
डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्यों से पूछा था कि इस मामले में कितनी शिकायतें मिली है और कितने मामलों में एफआईआर दर्ज किया गया है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों की तादाद के हिसाब से जांच करने में सीबीआई सक्षम है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सीबीआई, केंद्र सरकार साइबर क्राइम अंबाला, हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए कहा था कि लोगों की जीवन भर की बचत से ठगी करने वाले बड़े सिंडिकेट का पता लगाने की जरूरत बताई है.
कोर्ट ने कहा था कि बॉम्बे हाईकोर्ट में विभिन्न फर्जी कार्यवाहियों और सीबीआई, ईडी जांच के झूठे दावे सामने आए है. दस्तावेजों की जालसाजी और इस अदालत तथा हाई कोर्ट के नाम, मुहर और न्यायिक प्राधिकरण का बेशर्मी से आपराधिक दुरुपयोग गंभीर चिंता का विषय है. कोर्ट ने कहा था कि न्यायाधीशों के फर्जी हस्ताक्षरों वाले न्यायिक आदेश न्यायपालिका पर जन विश्वास प्रणाली की नींव पर प्रहार करते हैं. कोर्ट ने कहा था कि यह मामला कोई अकेला मामला नही है. उन्होंने कहा था कि मीडिया में इस तरह की खबरे कई बार छपी है.
फर्जी अधिकारी बनकर बुजुर्ग दंपती से करोड़ों की ठगी
सुप्रीम कोर्ट ने अंबाला में बुजुर्ग महिला से फर्जी आदेश दिखाकर ठगी की बात सामने आने के बाद स्वतः संज्ञान लिया था. दरअसल सितंबर में हरियाणा रोडवेज विभाग की रिटायर्ड ऑडिटर शशिबाला सचदेवा और उनके पति से फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने करोड़ों रुपये की ठगी कर ली थी. इतना ही नही पीड़ित महिला और उनके पति को 13 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया था.
उस दौरान मानसिक प्रताड़ना और जान से मारने तक कि धमकी दी गई. जिसकी शिकायत पीड़िता ने पुलिस से की थी, उन्होंने पुलिस को बताया था कि 3 सितंबर को उनके व्हाट्सएप नंबर पर एक महिला ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी ऑथोरिटी से बताते हुए संपर्क किया और कहा कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आ रहा है. जिसके बाद कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.
-भारत एक्सप्रेस
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