सुप्रीम कोर्ट से बिजनेसमैन पीआर राजेश कुमार को झटका लगा है. कोर्ट ने कुमार की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (TASMAC) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उनके आवास पर की गई ईडी (ED) की छापेमारी को चुनौती दी थी. मई 2025 में ईडी ने कुमार के आवास सहित अन्य जगहों पर छापेमारी की थी. सीजेआई (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए इस याचिका को खारिज कर दिया है.
ट्रिब्यूनल के सामने सारे आधार उठाने का अधिकार: सीजेआई सूर्यकांत
सीजेआई सूर्यकांत ने दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मद्रास हाईकोर्ट का आदेश पहले से ही याचिकाकर्ता को ट्रिब्यूनल के सामने सभी उपलब्ध आधार उठाने का अधिकार देता है. मद्रास हाईकोर्ट ने तलाशी की वैधता की जांच करने से इनकार कर दिया था. राजेश कुमार ने 16, 17 और 18 मई 2025 को अड्यार स्थित अपने आवास पर ईडी द्वारा की गई तलाशी और जब्ती की कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी.
PMLA की धारा 17 के नियमों का नहीं हुआ अनुपालन
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि मुख्य मुद्दा यह है कि क्या तलाशी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) 2002 की धारा 17 के अनुपालन में की गई. उन्होंने कहा कि धारा 17 के तहत तलाशी तभी की जा सकती थी, जब यह मानने के कारण लिखित रूप में दर्ज किए गए हों कि याचिकाकर्ता ने मनी लॉन्ड्रिंग की है, उसके पास अपराध से प्राप्त आय है, या उसके पास मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े रिकॉर्ड या संपत्ति है और निर्धारित प्रारूप में प्राधिकरण प्राप्त किया गया हो. उन्होंने यह भी कहा कि राजेश कुमार के आवास पर की गई तलाशी के लिए कोई वैध प्राधिकरण नहीं था.
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में की थी आलोचना
सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई को TASMAC घोटाले की जांच में ईडी द्वारा सारी हदें पार करने और संघीय शासन की अवधारणा का उल्लंघन करने के लिए आलोचना करते हुए कहा था, “आप व्यक्तियों के खिलाफ मामले दर्ज कर सकते हैं, लेकिन निगमों के खिलाफ?”
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TASMAC ने अपनी याचिका में ईडी को यह निर्देश देने की मांग की थी कि वह जांच की आड़ में उसके कर्मचारियों को परेशान न करे. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि राज्य की क्षेत्रीय सीमाओं के भीतर अपराध की जांच करने की ईडी की यह कार्रवाई संघवाद का उल्लंघन है. जबकि दूसरी ओर, ईडी का कहना है कि डिस्टिलरी कंपनियों और बॉटलिंग इकाइयों में बेहिसाब नकदी और अवैध भुगतान के माध्यम से गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी की गई है.
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