सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने 26 भारतीय नागरिकों के कथित रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे होने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की. याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ भारतीय नागरिकों को छात्र या पर्यटक वीजा पर रूस ले जाकर उन्हें युद्ध में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है, और उनके पासपोर्ट भी जब्त कर लिए गए हैं. याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि पिछले कई महीनों से परिवारों का अपने परिजनों से संपर्क नहीं हो पा रहा है और वे कथित तौर पर युद्ध क्षेत्रों में फंसे हो सकते हैं. याचिका में वियना कन्वेंशन के तहत कूटनीतिक सुरक्षा और सहायता का अधिकार दिलाने की भी मांग की गई है.
दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
रुस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच फंसे 26 भारतीयों को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है. यह याचिका 26 भारतीय नागरिकों के परिवार वालों की ओर से दायर की गई है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है. यह याचिका वकील ऋत्विक भनोत, अध्ययन गुप्ता और आयुष शंकर द्वारा दायर की गई है. याचिका में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है.
केंद्र सरकार से जवाब की मांग
दायर याचिका में केंद्र सरकार के साथ राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब की सरकारों और भारत में स्थित रूसी दूतावास को भी पक्षकार बनाया गया है. कोर्ट ने दायर याचिका पर केंद्र सरकार से एक सप्ताह में जवाब देने को कहा है. दायर याचिका में कहा गया है कि इन लोगों को रूस में बंधक बनाकर जबरन युद्ध लड़ने के लिए भेज दिया गया है. ये सभी भारतीय छात्र या पर्यटक वीजा पर रुस गए थे. दायर याचिका में उन सभी भारतीय नागरिकों के कथित प्रत्यर्पण के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है.
सॉलिसिटर जनरल का कोर्ट को आश्वासन
जो छात्र या पर्यटक वीजा पर रुस गए थे और अब कथित तौर पर यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध में भाग लेने के लिए मजबूर किए जा रहे हैं. कई लोगों ने दावा किया है कि उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उन्हें यूक्रेन के खिलाफ लड़ने के लिए मजबूर किया गया. यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि मानवीय संकट का रूप ले रहा है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि सरकार इस मामले की जांच कर जरूरी कदम उठाएगी.
याचिका में यह भी कहा गया है कि पिछले साल सितंबर से अक्टूबर के बाद कई परिवारों को अपने सदस्यों से संपर्क नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि पिछली बार जब उनसे संपर्क हुआ था वह सेलिदोव, मकिवका जिसे कई ऐसे युद्ध क्षेत्र है जहां वो हो सकते है. याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि वियना कन्वेंशन के तहत दूसरे देश में रह रहे लोगों को कूटनीतिक पहुच, सहायता और सुरक्षा का अधिकार है. लेकिन इन चीजों से उन्हें वंचित किया गया है. इसके बाद उनके परिजनों ने विदेश मंत्रालय, रूस स्थित भारतीय दूतावास, गृह मंत्रालय, राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन सहित कई जगहों पर लगातार गुहार लगाई, लेकिन अभी तक कोई जानकारी नही मिली है.
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-भारत एक्सप्रेस
Written By: Shubhra Rai (Intern)
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