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सुप्रीम कोर्ट ने पलटा गुजरात हाई कोर्ट का फैसला; अडानी पावर को राहत, बिजली पर वसूला गया टैक्स 8 हफ्ते में लौटाने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अडानी पावर को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SEZ (विशेष आर्थिक क्षेत्र) से घरेलू बाजार (DTA) में भेजी जाने वाली बिजली पर सीमा शुल्क नहीं लगाया जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट से अडानी पावर को बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने फैसला सुनाया की विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) से घरेलू बाजार में आपूर्ति की जाने वाली बिजली पर सीमा शुल्क नही लगाया जा सकता. कोर्ट ने जून 2019 के गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है और कंपनी को मुंद्रा प्लांट में उत्पादित बिजली पर लगने वाले शुल्क से मुक्त कर दिया है. इससे 2010 से चला आ रहा विवाद खत्म हो गया है.

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने यह फैसला दिया है. यह शुल्क कानून के दायरे में नहीं आता है और सरकार किसी अवैध कर के तहत एकत्र की गई राशि को अपने पास नहीं रख सकती. कोर्ट ने सीमा शुल्क अधिकारियों को अडाणी समूह की कंपनी से वसूला गया शुल्क वापस करने का निर्देश दिया और संबंधित सीमा आयुक्त को फैसले की तारीख से आठ सप्ताह के भीतर सत्यापन पूरा करके रिफंड जारी करने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ तौर पर कहा है कि मुंद्रा SEZ में पैदा की गई बिजली, जब SEZ के बाहर यानी DTA में भेजी जाती है, तो उसपर कस्टम डियूटी नहीं लगाई जा सकती है. कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि बिजली कोई ऐसी वस्तु नहीं है, जिस पर इस तरह की कस्टम डियूटी वसूली जाए, जैसा कि संबंधित ऑथोरिटीज कर रही थी.

अडानी को 500 करोड़ का रिफंड मिलने की संभावना

मामले की सुनवाई के दौरान अडानी पावर की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया था कि अगर फैसला कंपनी के पक्ष में आता है तो करीब 500 करोड़ रुपए का रिफंड बन सकता है.जुलाई 2015 में गुजरात हाई कोर्ट ने टैक्स फ्रेमवर्क के एक हिस्से को रद्द कर दिया और कहा कि अडानी जून 2009 और सितंबर 2010 के बीच सीमित समय के लिए SEZ से DTA को सप्लाई की गई बिजली पर कस्टम डियूटी से छूट का हकदार है.

वही 2015 के फैसले के बाद, SEZ अधिकारियों ने यह रुख अपनाया कि छूट सख्ती से उस सीमित अवधि तक सीमित थी और उसके बाद सप्लाई की गई बिजली पर डियूटी देय थी.

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-भारत एक्सप्रेस



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