सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग लड़के के अपहरण के मामले में तमिलनाडु के केवी कुप्पम के विधायक जगन मूर्ति को राहत मिल गई है. जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस एन. के .सिंह की बेंच ने जगन मूर्ति की ओर से दायर याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट ने 25 हजार रुपए की निजी मुचलके पर यह जमानत दी है. कोर्ट ने मूर्ति को अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि वह जांच में सहयोग करेंगे और सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे और ना ही गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे.
संदेह जताया गया है कि विधायक पूवई जगनमूर्ति और अतिरिक्त डीजीपी जयराम एक नाबालिग लड़के के अपहरण में शामिल है, जो तिरुवल्लूर जिले में एक प्रेमी युगल की घटना में लापता हुए व्यक्ति का भाई है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट से कहा कि याचिकाकर्ता को इस केस से कोई लेना देना नही है. उसे जानबूझकर कर फंसाया गया है.
इससे पहले कोर्ट ने जयराम को दिया था राहत
बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ADGP एच एम जयराम को राहत दे दिया था. कर्नाटक सरकार के आश्वासन के बाद कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया था. कर्नाटक सरकार ने जवाबी हलफनामा दाखिल कर कहा था कि राज्य में फिल्म रिलीज होने पर कोई रोक नहीं है. मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में कथित आरोपी विधायक एम जगन मूर्ति द्वारा दायर एक अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए तमिलनाडु पुलिस को जयराम को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया था.
सुप्रीम कोर्ट में दी गई थी चुनौती
जयराम ने मद्रास हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उनकी गिरफ्तारी के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. तिरुवलंकाडू पुलिस ने अपहरण मामले में जयराम की लिप्तता की आशंका व्यक्त की थी. जिसकी जांच कर रिपोर्ट देने को जयराम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था. हालांकि जयराम तीस जून को रिटायर्ड होने वाले हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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