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Voter List SIR: सुप्रीम कोर्ट में कल भी जारी रहेगी सुनवाई, आधार और नागरिकता के सबूत पर छिड़ी बहस

विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है.

Voter List SIR: अलग-अलग राज्यों में हो रहे एसआईआर को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं पर 29 जनवरी को भी सुनवाई जारी रहेगी. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले में सुनवाई कर रही है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि वोटर लिस्ट की नियमित रूप से एसआईआर की जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि केवल भारतीयों नागरिकों के नाम ही मतदाता सूची में हो.

वरिष्ठ वकील विजय हंसरिया ने कहा कि वोट देने का अधिकार सिर्फ नागरिकों को है. उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में अवैध प्रवासी आए हैं. खासकर 1971 के बाद जिससे कई राज्यों की आबादी का संतुलन बदला है. उन्होंने कहा है कि आधार कार्ड सिर्फ पहचान का दस्तावेज है, इससे नागरिकता साबित नहीं होती. कोई भी व्यक्ति जो भारत में रह रहा है, वह आधार बनवा सकता है. आधार न तो जन्मतिथि का पक्का सबूत है, न नागरिकता का और न ही स्थायी निवास का इसलिए एसआईआर के लिए आधार को मुख्य दस्तावेज नही माना जा सकता.

इसपर जस्टिस बागची ने कहा कि पासपोर्ट का काम भी निजी एजेंसियों के जरिए होता है, फिर भी उसे सरकारी दस्तावेज माना जाता है. उन्होंने कहा कि आधार पहचान का एक मान्य दस्तावेज है, हालांकि इससे नागरिकता साबित नहीं होती. चुनाव आयोग जरूरत पड़ने पर इसकी जांच कर सकता है.

वोटर लिस्ट में बदलाव पर सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया है वोटर लिस्ट से नाम हटाने की कार्रवाई सभी पार्टियों के मतदाताओं पर हुई है, इसलिए चुनाव आयोग पर किसी पार्टी को फायदा पहुचाने का आरोप नहीं लगाया जा सकता है. वही सिब्बल ने कहा कि चुनाव कराने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है, इसपर कोई विवाद नहीं है. सवाल यह है कि वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर बदलाव की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और नियमो के अनुसार है. उन्होंने कहा कि नागरिकता तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, न कि चुनाव आयोग के पास. अगर किसी की नागरिकता पर सवाल उठता है तो उसे तय करने का काम सरकार का है.

चुनाव आयोग किसी का नामवोटर लिस्ट से हटा सकता है, लेकिन यह नहीं कह सकता कि वह व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है. जस्टिस बागची ने कहा कि वोटर लिस्ट में सुधार के दौरान नाम जोड़ना और हटाना दोनों प्रक्रियाएं साथ चलती है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि किसी अधिकार का होना और उसका सही तरीके से इस्तेमाल होना, ये दोनों अलग बातें है.

यह सिर्फ तकनीकी मामला नहीं, लोकतंत्र के भविष्य का सवाल- सिब्बल

सुनवाई के दौरान सिब्बल ने यह भी कहा कि यह मामला सिर्फ तकनीकी नहीं है, बल्कि इससे देश के लोकतंत्र का भविष्य से जुड़ा है. वोटर लिस्ट से नाम हटाने जैसी बड़ी प्रक्रिया जल्दबाजी में या बिना ठोस वजह के नहीं होना चाहिए. जबकि राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने कोर्ट को बताया कि चुनाव आयोग ने अब तक उनके द्वारा रखे गए तथ्यों, आंकड़ों या तरीकों पर ठोस आपत्ति नहीं कि है.

उन्होंने कहा कि किसी भी वोटर लिस्ट के लिए तीन बातें जरूरी होती हैं, पूरी होना, निष्पक्ष होना, सही होना. यादव ने कहा कि एसआईआर के बाद वोटर और आबादी के अनुपात में अचानक गिरावट आई है. यह कोई संयोग नहीं, बल्कि सिस्टम में खामी का संकेत है. यादव ने चुनाव आयोग की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए है.

असम को छोड़कर हर राज्य में वोटर संख्या में गिरावट

उन्होंने कहा कि समस्या वोटर लिस्ट को सुधारने की नहीं है, बल्कि जिस तरह का सुधार किया जा रहा है, वही लोगों को वोट के हक से बाहर कर रहा है. उन्होंने कहा कि हर राज्य में वोटर की संख्या घटी है. यह संयोग नही है. जस्टिस बागची ने कहा कि कुछ राज्यों में दो जगह नाम दर्ज होने की वजह से डुप्लीकेशन हो सकता है. इसपर यादव ने कहा कि अगर ऐसा है तो फिर लगभग हर राज्य में वोटर क्यों घट रहे है.

उन्होंने कहा कि अगर पूरा देश अमेरिका नहीं जा रहा, तो सभी राज्यों में वोटर कम कैसे हो सकते? उन्होंने बताया कि असम को छोड़कर, जहां भी एसआईआर नहीं हुआ, बाकी हर राज्य में वोटरों की संख्या गिरी है. महिलाएं सबसे ज्यादा बाहर हुई है. सबसे ज्यादा असर.महिलाओं पर पड़ा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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