आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट 29 जनवरी को भी सुनवाई जारी रहेगा. जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी अंजारिया की बेंच मामले में सुनवाई कर रही है. कोर्ट ने स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और दूसरी संस्थाओं में आवारा कुत्तों की मौजूदगी पर चिंता जताई है.
मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि मैंने अपनी नोट में चार पहलुओं पर चर्चा की है. एबीसी (एनीमल बर्थ कंट्रोल) केंद्रों का कामकाज, कोर्ट के निर्देशानुसार डॉग पाउंड्स की आवश्यकता, हाईवे की पहचान और मवेशियों के प्रवेश की रोकथाम, एमिकस क्यूरी ने आंध्र प्रदेश से शुरुआत करते हुए राज्यवार आंकड़े प्रस्तुत किए. राज्यों को मौजूदा सुविधाओं का ऑडिट करना चाहिए. नए एबीसी केंद्र चरणबद्ध तरीके से स्थापित किए जा सकते हैं और इसके लिए समय-सीमा तय की जानी चाहिए.
स्कूल-कॉलेजों में आवारा कुत्तों पर फोकस
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने पूछा कि क्या बजटीय आवंटन के बारे में कोई संकेत है? इसपर एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि 14000 संस्थानों की पहचान की गई है. 1145 आवारा कुत्तों को स्थानांतरित किया गया है. शैक्षणिक संस्थानों में आवारा कुत्तों की पहचान में राज्यों को सहायता लेनी चाहिए. डॉग पाउंड्स से समन्वय होनी चाहिए. 204 हाइवे स्ट्रेच की पहचान की गई है और 414 मवेशियों को पाउंड शेल्टर में शिफ्ट किया गया है. मामले की सुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि एमिकस क्यूरी द्वारा दिए गए सुझाव पर उन्हें कोई आपत्ति नही है.
एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को यह भी बताया कि असम में 3 म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन है. इन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि एबीसी केंद्र अपर्याप्त है. राज्य को एक ठोस एक्शन प्लान देना चाहिए. जस्टिस मेहता ने कहा कि क्षमता क्यों नही बढ़ाई जा रही है? छह केंद्र तो बहुत कम है. स्टाफ की संख्या बहुत कम है. उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त कर्मचारियों के काम नहीं हो सकता है. इसपर एमिकस क्यूरी ने कहा कि असम को अधिक प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है. बिहार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर राज्य में छह लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं, तो सिर्फ 20 हजार कुत्तों की नसबंदी काफी नहीं है.
2024 में एक लाख से ज्यादा केस
कोर्ट ने कहा कि ज्यादातर राज्यों ने कुत्तों के काटने के मामलों का सही आंकड़ा नही दिया है. जस्टिस मेहता ने कहा कि साल 2024 में एक लाख से ज्यादा कुत्ते काटने के मामले सामने आए, जबकि जनवरी 2025 में ही करीब 20,900 मामले दर्ज हुए. उन्होंने इसे चौकाने वाला बताया है. गोवा और केरल के समुद्री इलाकों में आवारा कुत्तों की वजह से पर्यटकों पर हमले की बात भी सामने आई. कोर्ट ने कहा कि बीच पर कुत्तों को वापस छोड़ना सही नही है. क्योंकि इससे योगों की सुरक्षा और पर्यटन दोनों प्रभावित होते है. कर्नाटक के मामले में कोर्ट ने माना कि राज्य ने कुछ अच्छी जानकारी दी है, लेकिन वहां भी कई जगह साफ जवाब नहीं मिले.
झारखंड के दावों पर कोर्ट ने शक जताया और कहा कि इतने कम समय में इतने ज्यादा कुत्तों की नसबंदी संभव नही लगती. सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रमनाथ ने सभी राज्यों को चेतावनी देते हुए कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या पर अब ठोस और जमीन पर दिखने वाला काम चाहिए. सिर्फ कागजी दावे नहीं हो.
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-भारत एक्सप्रेस
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