वक्फ संशोधन कानून को लेकर केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में आश्वासन दिए जाने के बावजूद उत्तराखंड में हजरत कमाल शाह दरगाह को तोड़े जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन, देहरादून के जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल, देहरादून के सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह और देहरादून नगर आयुक्त नमामि बंसल को नोटिस जारी किया है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि सरकार के आश्वासन के बावजूद दरगाह को गिरा दिया गया. कोर्ट ने सरकार ने आश्वासन के उल्लंघन पर चिंता जताई है.
17 अप्रैल को वक्फ बोर्ड संशोधित कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आश्वासन का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है. याचिका में कहा गया है कि आश्वासन के बावजूद पंजीकृत वक्फ संपत्ति को नष्ट कर दिया गया.
यह अवमानना याचिका उत्तराखंड के महफूज अहमद ने दायर की है. देहरादून के रहने वाले याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि राज्य प्रशासन ने बिना किसी नोटिस के दरगाह को ढहा दिया है, जबकि सरकार सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधित कानून को लागू नहीं करने का आश्वासन दिया था.
याचिका में यह भी कहा गया है कि यह दरगाह 1982 में सुन्नी सेंट्रल बोर्ड ऑफ लखनऊ के साथ पंजीकृत थी. याचिका में दावा किया कि दरगाह पिछले 150 वर्षों से धार्मिक महत्व का एक पूजनीय स्थल रहा है और संपत्ति की वैधता साबित करने वाले प्रासंगिक दस्तावेज उनके पास है. याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के पोर्टल पर की गई एक सामान्य शिकायत के आधार पर की गई थी.
उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार पंजीकृत 5700 वक्फ सम्पत्तियों की जांच करेगी और अतिक्रमण के मामलों में सख्त कार्रवाई करेगी.
बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आश्वासन दिया था कि अगले आदेश तक वक़्फ़ बोर्ड और काउंसिल में कोई नियुक्ति नहीं होगी और, अधिसूचना के जरिए वक़्फ़ घोषित हो चुकी प्रॉपर्टी को भी अगले आदेश तक डिनोटिफाइ नहीं किया जाएगा. इसमें वक़्फ़ by user प्रॉपर्टी भी शामिल है. साथ बिना नोटिस के उसे नही तोड़ा जाएगा.
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