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सुप्रीम कोर्ट के वकील पंकज शर्मा पर जानलेवा हमला, पुलिस की ढिलाई पर कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने अधिवक्ता पंकज शर्मा पर 11 जुलाई 2026 को हुए हमले और पुलिस की ढिलाई पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है.

Supreme Court

सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने अपने ही एक वरिष्ठ अधिवक्ता पंकज शर्मा पर घर में घुसकर किए गए कथित जानलेवा हमले और इस मामले में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में घोर लापरवाही के आरोपों को बेहद गंभीरता से लिया है. शीर्ष अदालत ने इस संबंध में दिल्ली पुलिस को आधिकारिक नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है.

सीजेआई सूर्यकांत की पीठ का सख्त आदेश

माननीय मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस से मामले की अब तक की प्रगति पर एक विस्तृत ‘स्टेटस रिपोर्ट’ मांगी है. इसके साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि पुलिस उपायुक्त (DCP) रैंक से नीचे का कोई भी अधिकारी इस मामले में हलफनामा (अफ़िडेविट) दाखिल नहीं करेगा. डीसीपी को स्वयं हलफनामा दायर कर यह स्पष्ट करना होगा कि इस गंभीर मामले में पुलिस द्वारा अब तक धरातल पर क्या ठोस कानूनी कार्रवाई की गई है.

मामले की लाइव सुनवाई के दौरान ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ (SCBA) के अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए. उन्होंने भावुक और तल्ख लहजे में कहा:

“यदि सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाले एक सम्मानित वकील के साथ देश की राजधानी दिल्ली में ऐसा जघन्य अपराध हो सकता है और इसके बावजूद पुलिस कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है, तो दिल्ली के एक आम नागरिक की सुरक्षा और स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.”

उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि हमले में वकील पंकज शर्मा के सिर में बेहद गंभीर और जानलेवा चोटें आई हैं, जिसके चलते उनके सिर पर आठ टांके लगाने पड़े हैं. इसके बावजूद पुलिस ने अब तक किसी भी नामजद आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है. उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि पीड़ित वकील और उनके परिवार को लगातार एफआईआर (FIR) वापस लेने की खूंखार धमकियां मिल रही हैं, इसलिए उन्हें तत्काल पर्याप्त पुलिस सुरक्षा दी जाए.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के जीवन और उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को किसी भी तरह का खतरा नहीं होना चाहिए. अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वे पीड़ित वकील को तुरंत आवश्यक और पुख्ता सुरक्षा उपलब्ध कराएं. सुनवाई के दौरान देश के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने भी इस घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए कोर्ट से दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करने का समर्थन किया.

11 जुलाई को घर में घुसकर हुआ था हमला

बता दें कि याचिकाकर्ता पंकज शर्मा पिछले 20 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में निरंतर वकालत कर रहे हैं. घटनाक्रम के अनुसार, 11 जुलाई 2026 को कुछ असामाजिक तत्वों ने उनके घर में जबरन घुसकर उन पर लोहे की रॉड और हथियारों से हमला किया था. इस हमले के दौरान उनके सिर में गहरी चोटें आईं, अत्यधिक खून बहने के कारण वे मौके पर ही बेहोश हो गए. उन्हें तुरंत गंभीर हालत में दिल्ली के पेंटामेड अस्पताल (Pentamed Hospital) में भर्ती कराना पड़ा, जहां डॉक्टरों द्वारा उनका मेडिको-लीगल केस (MLC) तैयार किया गया.

सुप्रीम कोर्ट में दायर मुख्य याचिका में आरोप लगाया गया है कि पहले तो स्थानीय पुलिस ने मामला रसूखदारों से जुड़ा होने के कारण एफआईआर दर्ज करने में जानबूझकर काफी देरी की. इसके बाद, जब मामले ने तूल पकड़ा तो अपराध की गंभीरता के बावजूद नवगठित ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) की बेहद हल्की और जमानती धाराएं लगा दी गईं. याचिकाकर्ता का आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) और गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित उपयुक्त व कड़ी कानूनी धाराएं जानबूझकर एफआईआर में शामिल नहीं की हैं.

SCBA ने लिखा पत्र

इस पूरी विवादित घटना की शुरुआत तब हुई जब एक अज्ञात व्यक्ति ‘अमित गर्ग’ नामक शख्स से मिलने के बहाने वकील पंकज शर्मा के घर में दाखिल हुआ. इसके कुछ ही देर बाद, वह अपने साथ कई अन्य लोगों को लेकर वहां लौटा और कथित रूप से हमला बोल दिया. आरोप है कि अमित गर्ग और क्षितिज गर्ग के नेतृत्व में आए इन दबंग हमलावरों ने पीड़ित के साथ बेरहमी से मारपीट की और उनका सिर जानबूझकर घर के बाहर लगे लोहे के भारी गेट से दे मारा, जिससे वे लहूलुहान हो गए.

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दायर याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि अगले दिन यानी 12 जुलाई 2026 को बेखौफ आरोपी दोबारा पीड़ित के घर पहुंचे और पूरे परिवार को अंजाम भुगतने तथा एफआईआर वापस न लेने पर जान से मारने की धमकी दी. इस दौरान घर में मौजूद वकील के नाबालिग बेटे ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल कर पुलिस को इस हमले की सूचना दी, जिसके बाद पुलिस रिकॉर्ड में आधिकारिक ‘डीडी एंट्री’ (Daily Diary Entry) दर्ज की गई.

जब सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) को अपने सदस्य के साथ हुई इस बर्बरता की जानकारी मिली, तो एसोसिएशन ने एक आपातकालीन बैठक बुलाकर इस पूरी घटना की कड़े शब्दों में निंदा की और दिल्ली पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) को पत्र लिखकर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है.



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