महाराष्ट्र में चुनाव आयोग की ओर से कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय चुनाव आयोग, राज्य चुनाव आयोग सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह नोटिस जारी किया गया है. कोर्ट अरुण आनंदगिरि की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील अरविंद दातार ने कहा कि 9 करोड़ में से 33% लोगों के नाम पूरी तरह हटा दिए गए हैं.
पुणे और बॉम्बे में 40 फीसदी मतदाता सूची से गायब है. लोगों से फॉर्म 6 भरने को कहा जा रहा है, लेकिन जो व्यक्ति 3-4 चुनावों से मतदाता रहा है, उसके लिए कोई प्रावधान नहीं है.
क्या इस मामले से जुड़ा कोई और केस भी लंबित है?- सीजेआई
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि क्या कोई और मामला भी लंबित हैं? दातार ने कहा कि मैंने पिछली बार भी इसका जिक्र किया था. उन्हें नवंबर तक सूची को अंतिम रूप न देने दें. इसे टाल दिया जाए. दातार ने कहा कि हटाए गए लोगों के नाम वापस जोड़ने के लिए कुछ समय चाहिए होगा. अभी कोई चुनाव भी नही है. पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने कोर्ट को बताया था कि महाराष्ट्र में कुल 9.79 करोड़ मतदाता है. इनमें से 1.2 करोड़ मतदाताओं को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी यानी तार्किक विसंगतियों के आधार पर पहचान किया गया.
उन्होंने यह भी दावा किया था कि पुणे और कुछ अन्य इलाकों में 40.6 फीसदी मतदाता मतदाता सूची से बाहर रह गए है.
इससे पहले महाराष्ट्र एसआईआर को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी, लेकिन हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने दो टूक सुनाते हुए कहा था कि जब इस मामले पर पहले से ही स्टे ऑर्डर मौजूद है और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, तो ऐसे में समानांतर याचिकाएं दाखिल करने का कोई सेंस नही बनता.
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-भारत एक्सप्रेस
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