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राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: राम जन्मभूमि ट्रस्ट को नोटिस जारी

अयोध्या श्रीराम मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में कथित वित्तीय गड़बड़ी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया है.

Ayodhya Ram Mandir theft Case

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में कथित वित्तीय गड़बड़ी की उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर एक बड़ा कदम उठाया है. शीर्ष अदालत ने इस संवेदनशील मामले पर संज्ञान लेते हुए ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ को आधिकारिक नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है.

सीजेआई सूर्यकांत की पीठ का आदेश

मामले की अहम सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण में पहले ही एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुका है और उत्तर प्रदेश राज्य सरकार द्वारा मामले की तह तक जाने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी कर दिया गया है. अदालत ने राज्य सरकार को कड़ा निर्देश देते हुए कहा कि वह अगले सोमवार से पहले इस जांच की मौजूदा ‘स्टेटस रिपोर्ट’ (प्रगति रिपोर्ट) कोर्ट के समक्ष दाखिल करे. माननीय मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. एस. मोहना की विशेष पीठ इस महत्वपूर्ण याचिका पर आगामी 20 जुलाई 2026 को अगली सुनवाई करेगी.

CBI जांच की मांग

यह संयुक्त याचिका सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अजय कुमार राय, वकील दिनेश कुमार यादव, हिंदू धर्म परिषद और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मौजूदा सांसद सुधाकर सिंह की ओर से सामूहिक रूप से दायर की गई है. दायर याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार की प्रशासनिक एसआईटी के बजाय केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की सीधी निगरानी में एक निष्पक्ष विशेषज्ञ समिति गठित कर पूरे घोटाले की जांच कराने की पुरजोर मांग की गई है, ताकि यह पूरी तरह साफ हो सके कि श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धा से अर्पित की गई दान की भारी-भरकम राशि में कोई वित्तीय गबन, अनियमितता या भ्रष्ट आचरण हुआ है या नहीं.

दान रजिस्टर सुरक्षित रखने की गुहार

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी आग्रह किया है कि वह राम जन्मभूमि ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश सरकार को ट्रस्ट के अकूत धन और अचल संपत्तियों की कड़ी निगरानी के लिए एक बेहद मजबूत ‘ऑडिट और जवाबदेही व्यवस्था’ विकसित करने का सख्त निर्देश जारी करे. इसके अलावा, जब तक इस मामले की पूरी निष्पक्ष जांच संपन्न नहीं हो जाती, तब तक मंदिर से जुड़े सभी महत्वपूर्ण प्रशासनिक रिकॉर्ड— जैसे बैंक खातों का संपूर्ण विवरण, आधिकारिक दान रजिस्टर, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और सभी डिजिटल डेटा को पूरी तरह सुरक्षित (प्रिजर्व) रखने के निर्देश दिए जाएं. याचिका में कोर्ट से एक निषेधाज्ञा आदेश जारी करने की भी मांग की गई है, ताकि कोई भी प्रभावी व्यक्ति किसी भी दस्तावेज, रिकॉर्ड या साक्ष्य को नष्ट न कर सके, हटा न सके या उसमें किसी तरह की छेड़छाड़ न कर पाए.

याचिका में SIT पर सवाल

याचिका में दलील दी गई है कि इस मामले में पूरी तरह पारदर्शी जांच और डिजिटल/भौतिक रिकॉर्ड के पुख्ता संरक्षण से ही देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास को बनाए रखने में मदद मिलेगी. हालांकि, याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की कार्यप्रणाली पर यह कहते हुए सवाल उठाए गए हैं कि एसआईटी ने एक नियमित आपराधिक मामले या पूर्ण एफआईआर को दर्ज किए बिना ही अपनी प्रारंभिक जांच शुरू कर दी थी.

याचिकाकर्ताओं का तर्क है, “सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी की जांच से जनता में कानून के प्रति अधिक विश्वास पैदा होगा. इसके विपरीत, किसी विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जाने वाली ऐसी प्रारंभिक जांच में केवल प्रशासनिक अधिकारी शामिल होते हैं, जिनके पास जटिल वित्तीय और आपराधिक जांच को सुलझाने की कोई विशेष तकनीकी योग्यता या अनुभव नहीं होता है.”

स्वतः संज्ञान लेने की थी मांग

उल्लेखनीय है कि इस संयुक्त याचिका से पहले सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य वरिष्ठ वकील अनूप अवस्थी ने भी सीजेआई को एक औपचारिक ‘लेटर पिटीशन’ (पत्र याचिका) भेजी थी. इसमें उन्होंने अयोध्या के इस पूरे घटनाक्रम पर सर्वोच्च न्यायालय से स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) लेकर तत्काल सुनवाई करने की मांग की थी. अवस्थी ने मांग की थी कि लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए इस मामले में तुरंत एक स्वतंत्र एफआईआर दर्ज हो और फिर कोर्ट की सीधी निगरानी में इसकी निष्पक्ष जांच के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाएं.

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कैश और विदेशी चंदे का मांगा पूरा हिसाब

आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह की ओर से दायर याचिका में विशेष रूप से अदालत से यह आग्रह किया गया है कि वह ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ को उसके आधिकारिक गठन के दिन से लेकर अब तक प्राप्त हुए सभी दानों, चढ़ावों, गुप्त दानों और वित्तीय योगदानों का एक-एक पूरा और प्रमाणित विवरण (स्टेटमेंट) कोर्ट के पटल पर पेश करने का आदेश दे. इस विवरण में श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया नकद दान (कैश), बैंक ट्रांसफर, विभिन्न डिजिटल भुगतान (यूपीआई आदि), विदेशी योगदान (FCRA चंदा), वस्तुओं के रूप में मिला भौतिक दान, भारी मात्रा में आया सोना, चांदी और अन्य सभी बहुमूल्य धातुएं व वस्तुएं अनिवार्य रूप से शामिल हों. इसके साथ ही, ट्रस्ट के सभी सक्रिय बैंक अकाउंट्स से संबंधित विस्तृत ट्रांजैक्शन डिटेल्स देने की भी पुरजोर मांग की गई है.



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