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सुप्रीम कोर्ट में बंदरों का आतंक: परिसर और जजों के बंगलों की सुरक्षा के लिए जारी हुआ टेंडर

दिल्ली में बंदरों के आतंक से सुप्रीम कोर्ट भी परेशान है. कोर्ट परिसर और न्यायाधीशों के आवासीय बंगलों से बंदरों को भगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने 100 प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती के लिए टेंडर जारी किया है.

SUPREME COURT

सुप्रीम कोर्ट ने अपने परिसर और न्यायाधीशों के आवासीय बंगलों में बंदरों के बढ़ते आतंक को रोकने के लिए एक टेंडर जारी किया. बंदरों के आतंक से सुप्रीम कोर्ट भी परेशान हो गया है. यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने परिसर और न्यायाधीशों के आवासीय बंगलों में बंदरों के बढ़ते आतंक को रोकने के लिए एक टेंडर जारी किया है.

100 प्रशिक्षित कर्मियों की होगी तैनाती

सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी टेंडर नोटिस में कर्मचारी मुहैया कराने वाली एजेंसियों से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के बंगलों, सुप्रीम कोर्ट परिसर और अतिथि गृह में बंदरों की समस्या से निपटने के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने के लिए यह टेंडर जारी किया है. 2 अप्रैल 2026 को जारी टेंडर के माध्यम से कोर्ट ने अगले 2 वर्षों के लिए एक विशेषज्ञ एजेंसी की सेवाएं लेने का निर्णय लिया है, जो बंदरों को भगाने के लिए लगभग 100 प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती करेगी.

एजेंसियों से मांगी गईं निविदाएं

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की करीब 40 कोठियों पर बंदरों को भगाने-डराने के इंतजाम के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे. सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित नोटिस के मुताबिक जजों की कोठियों यानी सरकारी आवास और गेस्ट हाउस के परिसरों में आतंक मचाने वाले बंदरों को दूर रखने के लिए हाउस कीपिंग की विशेषज्ञ एजेंसियों से सीलबंद निविदाएं मांगी गई थीं. ये बंगले सुप्रीम कोर्ट से 3 से 4 किलोमीटर तक की दूरी पर हैं.

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यूपी समेत कई अन्य राज्यों में भी है समस्या

बता दें कि बंदरों का आतंक सिर्फ दिल्ली में ही नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश सहित कई अन्य राज्य भी बंदरों के आतंक से जूझ रहे हैं. पिछले महीने इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद और मथुरा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में बंदरों के बढ़ते आतंक एवं मानव-बंदर संघर्ष के गंभीर मुद्दे पर एसओपी के तहत की गई कार्रवाई की रिपोर्ट को तलब किया है. दायर याचिका में मांग की गई है कि बंदरों के लिए एक उचित एक्शन प्लान बनाया जाए, जिसमें उनके चिकित्सा केंद्र, बचाव वैन और खाने की व्यवस्था शामिल हो. इसके अलावा एक हेल्पलाइन पोर्टल शुरू करने की मांग की गई है.



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