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मृत्युदंड के प्रावधान वाले जघन्य मामलों में पीड़ित और समाज केंद्रित दिशानिर्देश जारी करने की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने जघन्य अपराधों में मृत्युदंड से संबंधित पीड़ित और समाज केंद्रित दिशा निर्देशों की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई मेरिट नहीं है.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने जघन्य अपराधों में मृत्युदंड के प्रावधान वाले जघन्य मामलों में पीड़ित और समाज केंद्रित दिशानिर्देश जारी करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि याचिका में मेरिट नही है. जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी अंजारिया की पीठ ने कहा कि केंद्र की ओर से दायर अर्जी में कोई मेरिट नजर नही आ रहा है.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पहले ही 2024 में आए महाराष्ट्र सरकार बनाम प्रदीप यसवंत कोकडे फैसले में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा निर्देश दिया जा चुका है. जिससे हर राज्य में दया याचिका की प्रोसेसिंग के लिए डेडिकेटेड सेल बनाना अनिवार्य किया गया है ताकि देरी न हो. दायर याचिका में 2014 के शत्रुध्न चौहान बनाम यूनियन ऑफ इंडिया फैसले में कुछ नए दिशा निर्देश जारी करने की मांग की गई थी.

समयसीमा तय करने की मांग की गई

याचिका में कहा गया था कि मृत्युदंड से संबंधित मौजूदा दिशा निर्देश केवल आरोपी और दोषी केंद्रित है. दायर याचिका में क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने की समयसीमा तय करने की मांग की गई थी, इसके अलावे दया याचिका मृत्यु वारंट जारी होने के सात दिन के अंदर ही दाखिल करनी होगी, दया याचिका खारिज होने के सात दिन के अंदर फांसी दी जा सके, चाहे किसी सह आरोपी की कानूनी प्रक्रिया लंबित क्यों न हो और कोर्ट को यह भी स्पष्ट करने को कहा गया कि एक दोषी की कानूनी लड़ाई के कारण दूसरे दोषी की फांसी टलनी नहीं चाहिए.

बता दें कि वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने फांसी की सजा पाए कैदियों के अधिकारों की रक्षा के लिए अहम दिशा निर्देश जारी किया था. जारी दिशा निर्देश में कहा गया था कि यदि दया याचिका पर लंबे समय तक फैसला नही होता, तो यह फांसी को उम्रकैद में बदलने का आधार बन सकता है, राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किए जाने की सूचना और फांसी की तारीख के बीच कम से कम 14 दिन का समय दिया जाना चाहिए, ताकि दोषी कानूनी उपाय अपना सके और मानसिक रूप से भी तैयार हो सके.

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-भारत एक्सप्रेस



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