सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग वाली याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दे दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने इसे संविधान पीठ के पास भेजने की मांग की, जिसका सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विरोध किया और कहा कि हम इस मामले में अपना जवाब दाखिल करना चाहते है, लिहाजा समय दिया जाए.
सीजेआई बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने केंद्र सरकार को जबाव दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का.समय दे दिया. सीजेआई गवई ने कहा कि सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही निर्णय लिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा देखिए पहलगाम में क्या हुआ.
जम्मू-कश्मीर राज्य दर्जा बहाली पर सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य का दर्जा 2019 में छीन लिया गया था और अब हम 2025 में है, बहुत पानी बह चुका है, जिसके जवाब में तुषार मेहता ने कहा और खून भी. जबकि इरफान लोन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि आश्वासन दिया गया था और कुछ नहीं किया गया. संविधान के संदर्भ में यह एक बुरी मिसाल है और संविधान के अनुच्छेदों में राज्य से केंद्र शासित प्रदेश में इस तरह के परिवर्तन की परिकल्पना नही की गई है.
वही अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पीसी सेन ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है. हम मूल मामले में याचिकाकर्ता थे. क्या वचन दिया गया था? इसका मतलब है कि उन्हें कम से कम राज्य का दर्जा देने वाला विधेयक पेश करने का प्रयास किया जाना चाहिए. ताकि कम से कम संसद में इस पर चर्चा हो. हमने देखा है कि आत्महत्या से होने वाली मौतें बढ़ी हैं.
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कोर्ट को बताया कि जम्मू कश्मीर ने प्रगति की हैं. सभी खुश है. वहां के 99.99 प्रतिशत लोग भारत सरकार को अपनी सरकार मानते है. इसलिए उनकी कही गई बातों पर पूरी तरह से संदेह नहीं किया जाना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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