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सुप्रीम कोर्ट ने कफ सिरप पीने से बच्चों की हुई मौत की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका खारिज

जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जरूरी दस्तावेज न होने पर हाई कोर्ट जाने की सलाह दी.

Telangana News, Supreme Court, OBC Reservation
Edited by Radha Priya

सुप्रीम कोर्ट ने कफ सिरप पीने से बच्चों की हुई मौत की जांच की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. सीजेआई बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने यह आदेश दिया है. याचिकाकर्ता विशाल तिवारी ने कहा कि लापरवाही की इंतहा है. कई राज्यों में बच्चों की मौत की खबरें आई है. तमिलनाडु इसके लिए जिम्मेदार है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया. कहा कि यह जनहित याचिका समाचार पर में पढ़कर दायर की गई है. उन्होंने कहा कि घटना से संबंधित कोई भी दस्तावेज याचिकाकर्ता के पास मौजूद नही है. यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने दायर की गई थी. दायर याचिका में केंद्र सरकार, दवा नियामक संस्थाओं और राज्यों को निर्देश करने की मांग की गई थी. दायर जनहित याचिका में देशभर में जहरीली खांसी की दवाओं को तुरंत रिकॉल और बिक्री पर रोक लगाने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और पूरी घटना की सीबीआई जांच की मांग की गई थी.

सिरप हादसा: दवा नियंत्रण तंत्र की नाकामी

याचिका में कहा गया था कि सभी सिरप आधारित दवाओं का डीईजी/ईजी टेस्ट अनिवार्य करने, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति गठित हो जो दवा सुरक्षा तंत्र में सुधार की सिफारिश करें, पीड़ितों को मुआवजा देने और एक राष्ट्रीय डिजिटल ड्रग्स रिकॉल पोर्टल बनाया जाए ताकि नकली/जहरीली दवाओं की जानकारी तुरंत साझा की जा सके. जनहित याचिका में कहा गया था कि यह सिर्फ हादसा नहीं, सिस्टम की नाकामी है. जनहित याचिका में यह भी कहा गया था कि यह घटना कोई संयोग नहीं बल्कि भारत के दवा नियंत्रण तंत्र की संस्थागत विफलता है.

दवा निर्माण में निगरानी, परीक्षण और पारदर्शिता की कमी बार-बार बच्चों की जान ले रही है. याचिका में यह भी कहा गया था कि तमिलनाडु की कंपनी Sresan Pharma Pvt.Ltd द्वारा बनाए गए इस सिरप की देशभर में बिक्री हो रही थी, लेकिन केंद्र सरकार या CDSCO ने तुरंत राष्ट्रीय स्तर पर कोई रिकॉल या बैन जारी नहीं किया. इस बीच तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र सरकार ने राज्य स्तर पर उत्पाद को निलंबित किया, लेकिन तब तक कई बच्चों की जान जा चुकी थी.

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HO ने भारत सरकार से मांगा जवाब

बता दें कि एसआईटी ने श्रीसन कंपनी के डायरेक्टर रंगनाथन गोविंदन को गिरफ्तार किया जा चुका है. कोल्ड्रिफ में 48.6 प्रतिशत डीईजी यानी डायथिलीन ग्लाइकॉल मिला था. इसी की विषाक्तता से बच्चों की मौत हुई. बच्चों की लगातार हो रही मौत को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गंभीरता से लिया है.

WHO ने भारत सरकार से पूछा है कि जिस कफ सिरप को पीने से ऐसी घटनाएं हुई हैं, क्या उन्हें दूसरे देशों में भेजा गया है. पिछले 50 वर्षों में कई बार सैकड़ों बच्चे इस तरह के सिरप से मौत के मुंह में समा चुके हैं. इसकी शुरुआत तमिलनाडु से ही हुई थी. श्रीसन फार्मास्युटिकल 14 वर्षो से चेन्नई-बेंगलुरु हाइवे पर 2000 वर्ग फुट की इकाई चला रही है. इस पर कच्चे माल की जांच न करने, बैच रिलीज में लापरवाही और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी के आरोप है. कंपनी ने सिरप को मध्य प्रदेश, राजस्थान, पुड्डुचेरी और ओडिशा में सप्लाई किया था.

तमिलनाडु सरकार ने इन राज्यों को सिरप की बिक्री रोकने की सलाह जारी की है. केंद्र सरकार ने दो अन्य ब्रांड्स रेलिफ (शेप फार्मा) और रेस्पीफ्रेश (रेडनेक्स फार्मास्युटिकल्स) पर भी प्रतिबंध लगा दिया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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