पटाखा बैन पर राहत देने की जल्दबाजी में नहीं सुप्रीम कोर्ट, संतुलित कदम उठाने के निर्देश. (PC: भारत एक्सप्रेस)
Supreme Court Judges Bill 2026: राज्यसभा में बुधवार को उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा हुई. यह विधेयक लोकसभा से पहले ही पारित हो चुका है. चर्चा के बाद सदन में विधेयक को वापस करने की प्रक्रिया पूरी की गई. इस दौरान कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने सदन से वॉकआउट किया, जबकि कई गैर-एनडीए दलों के सदस्यों ने चर्चा में हिस्सा लिया.
सुप्रीम कोर्ट में अब होंगे 38 न्यायाधीश
केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाना और लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करना है. उन्होंने कहा कि सरकार न्यायपालिका के साथ मिलकर न्याय को अधिक सुलभ बनाने के लिए लगातार काम कर रही है.
मेघवाल ने बताया कि जब 28 जनवरी 1950 को सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई थी, तब वहां केवल 8 न्यायाधीश थे. इनमें एक प्रधान न्यायाधीश और सात अन्य न्यायाधीश शामिल थे. विधेयक पारित होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश समेत कुल 38 न्यायाधीश हो जाएंगे.
लंबित मामलों के निपटारे पर सरकार का जोर
कानून मंत्री ने कहा कि न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. इसके लिए न्यायिक व्यवस्था को डिजिटल और भौतिक दोनों स्तरों पर आधुनिक बनाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि पुराने मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष पीठों का गठन किया गया है, जो केवल पुराने दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई करेंगी.
उन्होंने कहा कि पहले न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की जरूरत समय-समय पर महसूस की जाती रही है. इसी क्रम में 5 मई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी.
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जल्द मिलेगी देश को पहली महिला CJI
महिला न्यायाधीशों के प्रतिनिधित्व को लेकर विपक्ष की टिप्पणियों का जवाब देते हुए अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि देश जल्द ही पहली बार किसी महिला को भारत के प्रधान न्यायाधीश के पद पर देखेगा. उन्होंने कहा कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में भी महिला मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति हुई है और सरकार नारी शक्ति को आगे बढ़ाने पर लगातार जोर दे रही है.
न्यायिक ढांचे को मजबूत करने पर जोर
मेघवाल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट भवन के विस्तार का काम भी जारी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में 795.53 करोड़ रुपये की लागत से केंद्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा न्यायालय परिसर के विस्तार का कार्य किया जा रहा है. इससे न्यायालय की कार्यक्षमता और न्याय वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी.
नियुक्ति प्रक्रिया संवैधानिक व्यवस्था के तहत
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच समन्वय से होने वाली प्रक्रिया है. उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 124 और उच्च न्यायालयों में नियुक्तियां अनुच्छेद 217 और 224 के तहत की जाती हैं.
उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के 1993 और 1998 के न्यायाधीश मामलों के फैसलों के आधार पर तैयार मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के अनुसार संचालित होती है.
भारत एक्सप्रेस
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