सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बिहार के ठेकेदार रिशु श्री को अंतरिम राहत दे दिया है. कोर्ट ने ईडी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दिया है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता सीधे सुप्रीम कोर्ट आने के बजाए पहले राहत के लिए संबंधित हाई कोर्ट जाने को कहा है.
PMLA की धाराओं पर उठा सवाल
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि 10 नवंबर तक ईडी रिशु श्री के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी. कोर्ट 10 नवंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कहा कि यह रिट याचिका व्यक्तिगत राहत के लिए नहीं बल्कि पीएमएलए के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है.
रिशु श्री की कंपनियों पर ED की नजर
वही ईडी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि रिशु श्री और उनकी कंपनियां बिहार सरकार के कई विभागों-जैसे जल संसाधन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, शहरी विकास, भवन निर्माण, शिक्षा और ग्रामीण कार्य विभाग में ठेकेदार या उपठेकेदार के रूप में कार्यरत हैं. ईडी के मुताबिक इन कंपनियों ने अवैध व्यक्तिगत लाभ के लिए सरकारी अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर निविदा प्रक्रिया में हेराफेरी की है.
ईडी ने जून 2025 में रिशु श्री से जुड़े ठिकानों पर बिहार के नौ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था. तलाशी के दौरान एजेंसी ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त करने का दावा किया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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