सुप्रीम कोर्ट नए भवन पर चार अशोक स्तंभ (राष्ट्रीय प्रतीक) लगाने की मांग पर विचार करने को तैयार हो गया है. यह याचिका बदरवाद वेणुगोपाल उर्फ बाबा खतरनाक ने दायर की है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ कहा कि आपकी मांग पर विचार किया जाएगा.
प्रशासनिक पक्ष में उठाना चाहिए था मामला
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आपको यह मामला प्रशासनिक पक्ष में उठाना चाहिए था. इसपर याचिकाकर्ता ने कहा कि नवंबर में सुप्रीम कोर्ट से जवाब मिला था कि अदालत अपना अलग लोगो इस्तेमाल करती है.
इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि संभव है यह निर्णय 24 नवंबर से पहले लिया गया हो, लेकिन अब इस पर विचार किया जाएगा. खासकर जब नया भवन बन रहा है.
मु्द्दा न्यायिक नहीं, प्रशासनिक
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल के समक्ष अपनी बातों को रखने के लिए कहा है. कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि यह मुद्दा न्यायिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर तय किया जाता है. इससे पहले बदरवाद वेणुगोपाल उर्फ बाबा खतरनाक ने वाराणसी में गंगा नदी के पानी की बिगड़ती गुणवत्ता को लेकर याचिका दायर किया था.
सीजेआई सूर्यकांत ने हाई कोर्ट जाने को कहा था. उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि हाई कोर्ट 10 किलोमीटर दूर है लेकिन फिर भी यहां पर आना चाहते है. मामला ह्यूमन सीवेज से.संबंधित था. वे संबंधित हाई कोर्ट जाने के लिए स्वतंत्र है.
क्या थी मुख्य शिकायत?
याचिकाकर्ता की मुख्य शिकायत बिना ट्रीटमेंट वाले कच्चे इंसानी मल और सीवेज के रियल टाइम्स डिस्चार्ज से जुड़ी थी, जिसके कारण गंगा के आसपास के इलाकों में सफाई फेल हो गई है.
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि गंगा के इंटरफेस पर बिना ट्रीटमेंट वाला इंसानी मल और सीवेज गंगा नही में रियल टाइम में मिलता है और भक्त उसी पानी को पवित्र गंगा जल के तौर पर इस्तेमाल करते है, और पूजा में इस्तेमाल करते है.
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-भारत एक्सप्रेस
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