Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

क्या सिर्फ पहचान के लिए सीमित होगा आधार? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्यों को जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को नागरिकता, जन्मतिथि और स्थायी पते के सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है.

Supreme Court order

सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड का इस्तेमाल नागरिकता, मूल निवास और आवासीय पते के सबूत के तौर पर गलत तरीके से किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार, देश की सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई है.

घुसपैठ को लेकर जताई चिंता

दायर याचिका में केंद्र सरकार, राज्यों और चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि आधार का इस्तेमाल सिर्फ पहचान की पुष्टि तक सीमित किया जाए. इसमें साफ कहा गया है कि आधार को सिर्फ पहचान का दस्तावेज माना जाए. इसे नागरिकता, स्थायी निवास, पता या जन्मतिथि साबित करने का जरिया न बनाया जाए. दायर याचिका में वर्तमान व्यवस्था पर कई कानूनी सवाल उठाए गए हैं.

याचिका में यह भी कहा गया है कि इस कमी का फायदा उठाकर घुसपैठिए और अवैध अप्रवासी भी आसानी से दूसरे सरकारी दस्तावेज बनवा रहे हैं. आजकल स्कूल एडमिशन, प्रॉपर्टी की खरीद, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और जन्म प्रमाण पत्र के लिए आधार का जमकर इस्तेमाल हो रहा है.

आधार एक्ट की धाराओं का दिया हवाला

दायर याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए एप्लिकेशन फॉर्म में जन्मतिथि और निवास के सबूत के तौर पर आधार का इस्तेमाल करना, आधार एक्ट 2016 की धारा 9, आरपीए (RPA) 1950 की धारा 23(4) और संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ माना जाए.

ये भी पढ़ें: पंजाब में RTE कानून लागू न होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय का कहना है कि फॉर्म 6 के तहत मौजूदा जांच प्रणाली बहुत कमजोर है. इसके कारण बिना सही दस्तावेजों के भी बाहरी लोगों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल होने का खतरा बना रहता है. कोर्ट से मांग की गई है कि चुनावी डेटाबेस की सुरक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति बनाई जाए, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और साइबर फॉरेंसिक एक्सपर्ट शामिल हों.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital