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पंजाब में RTE कानून लागू न होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में पिछले 15 वर्षों से शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम 2009 के प्रभावी ढंग से लागू न होने पर कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने निजी स्कूलों में 25% गरीब बच्चों के दाखिले को लेकर केंद्र और पंजाब सरकार को नोटिस भेजा है.

CJI Suryakant

पंजाब में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 लागू नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. कोर्ट ने दायर याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि 15 सालों से आरटीई कानून को क्यों नहीं लागू किया गया है. सीजेआई (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस बी. मोहना की अवकाशकालीन पीठ ने इसको लेकर केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

निजी स्कूलों में 25 फीसदी ईडब्ल्यूएस कोटा सुनिश्चित करने की मांग

दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि पंजाब में आरटीई एक्ट के प्रावधानों को लागू नहीं किया गया है. याचिका में केंद्र सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि पंजाब सरकार द्वारा अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी और निरंतर अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, जिसमें निजी स्कूलों में कक्षा 1 में कम से कम 25 फीसदी कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूह के बच्चों को प्रवेश देने से संबंधित प्रावधान भी शामिल है.

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य के कई बड़े और नामी प्राइवेट स्कूलों ने आरटीई के तहत एक भी गरीब बच्चे को दाखिला नहीं दिया है.

पिछड़े जिलों का डेटा इकट्ठा करने की सलाह

मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आरटीआई में जवाब अक्सर पूछे गए सवालों के हिसाब से ही आता है. जमीनी हकीकत को पूरी तरह साफ करने के लिए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह देते हुए कहा कि वे पंजाब के दो सबसे पिछड़े या गरीब जिलों की पहचान करें और वहाँ से पूरा डेटा इकट्ठा करें.

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कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से पहले दायर किए गए एक हलफनामे का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 450 से अधिक छात्रों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिया गया था. याचिकाकर्ता ने कहा कि यह संख्या लगभग 50 हजार होनी चाहिए थी, क्योंकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रवेश स्तर पर हर साल लगभग दो लाख छात्रों को प्रवेश दिया जाता है.

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी वर्ग के छात्रों के प्रवेश के लिए निजी स्कूलों को भुगतान किस प्रकार किया जाता है और क्या सरकार उन्हें प्रतिपूर्ति (रीइंबर्समेंट) करती है. इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि अधिनियम में ही सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क का प्रावधान है.



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