सुप्रीम कोर्ट ने राजमार्गो से आवारा पशुओं को हटाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार, देश के सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और NHAI को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ सुनवाई कर रही है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार 10 फीसदी गौ-उपकर वसूल रही है और कुछ नही कर रही है.
NHAI के वकील ने कहा कि मुझे बताया गया था कि यह वही मामला है, जिसमें फैसला सुरक्षित रख लिया गया है. कोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिकारियों से पूछा है कि हाइवे को पशु मुक्त बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे है. यह याचिका लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद जवाब मांगा है.
पशु कल्याण के लिए अलग फंड आवंटन की मांग
दायर याचिका में नेशनल हाइवे और एक्सप्रेसवे पर अनिवार्य फेंसिंग यानी बाड़ लगाने की मांग की गई है. इसके स्थायी समाधान निकालने के लिए याचिकाकर्ता ने कुछ सुझाव भी दिया है. इसमें साइंटिफिक तरीके से संचालित गौवशालाओं और पशु आश्रय गृहों की स्थापना मांग की गई है. साथ ही इसके लिए अलग से फंड आवंटित करने की मांग की गई है. राजमार्गो या सड़कों या एक्सप्रेसवे पर पाए जाने वाले सभी जानवरों को तुरंत हटाने के लिए एक संयुक्त समन्वित अभियान चलाया जाएगा. इसके साथ ही.मवेशियों और अन्य पशुओं को सभी आवश्यक देखभाल प्रदान की जाएगी. कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है.
अदालत ने कुत्ते के काटने के पीड़ितों की सुनवाई का आदेश दिया
इससे पहले सभी राज्यों के मुख्य सचिवों ने आवारा कुत्तों के काटने की समस्या को रोकने के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों पर जवाब दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी थी. अदालत ने कहा था कि कुत्ते के काटने के पीड़ितों की भी सुनवाई होनी चाहिए और कुत्ते के काटने के मामले की सुनवाई में भाग लेने के लिए उनकी याचिका को अनुमति दे दी है.
कोर्ट ने कहा था कि वह सरकारी भवनों के परिसरों में कुत्तों को खाना खिलाने को लेकर दिए गए आदेश आगे भी जारी रहेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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