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शिक्षा के अधिकार अधिनियम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने आरटीई अधिनियम 2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को सख्ती से लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

Supreme Court

शिक्षा के अधिकार अधिनियम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को सख्ती से लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, देश के सभी राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने हरि प्रिया द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह नोटिस जारी किया है.

दायर याचिका में मांग की गई है कि 6 से 14 साल के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा अनिवार्य करता है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि प्रमुख मुद्दों में से एक देश भर में बच्चों के लिए पूर्व प्राथमिक शिक्षा को लागू किया जाना है. साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन का मुद्दा भी उठाया, जिसे समय-समय पर अद्यतन किया गया है.

कौशल विकास और शिक्षा पर फोकस

दायर जनहित याचिका में निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा (आरटीई) अधिनियम 2009 के पूर्ण क्रियान्वयन का भी अनुरोध किया है. दायर याचिका में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पूर्ण कार्यान्वयन की भी मांग की गई है. दशकों पुराने 10+2 के ढांचे को बदलकर 5+3+3+4 मॉडल (3-18 वर्ष) लाने वाली यह नीति कौशल विकास और लचीला शिक्षा पर आधारित है. दायर याचिका में कहा गया है कि कक्षा 6 से व्यावसायिक प्रशिक्षण एआई, कोडिंग और बहु भाषावाद जैसे आधुनिक विषयों का लाभ देश के हर हिस्से के छात्रों को मिलना चाहिए.

नई शिक्षा नीति एक व्यापक ढांचा है, जो शिक्षा प्रणाली को लचीलेपन, कौशल विकास और समग्र शिक्षा पर केंद्रित करते हुए रूपांतरित करता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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