Bharat Express DD Free Dish

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को पॉक्सो के तहत स्थानीय पुलिस को भी देनी होगी जानकारी: सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री के प्रसार को लेकर चिंता जताई है. जस्टिस जे. बी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने दायर याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

ओडिशा में डीजीपी नियुक्ति में नियमों की अनदेखी के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई.

(सुप्रीम कोर्ट)

Edited by Shubhra Rai

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री के प्रसार को लेकर चिंता जताई है. जस्टिस जे. बी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने दायर याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अदालत ने याचिकाकर्ता को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और कानून एवं न्याय मंत्रालय को भी पक्षकार बनाने को कहा है. कोर्ट ने इन दोनों मंत्रालय को भी जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

24 सितंबर को मामले में अगली सुनवाई

कोर्ट 24 सितंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा. यह याचिका राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस ने वरिष्ठ वकील एच. एस फुल्का के माध्यम से दायर की है. दायर याचिका में सोशल मीडिया इंटेरमीडियरी के स्तर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री की पहचान, रिपोर्टिंग और कार्रवाई में कथित खामियों को उजागर किया गया है. याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऐसी घटनाओं की जानकारी अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन (एनसीएमइसी) को तो देते हैं, लेकिन पॉक्सो कानून के तहत संबंधित स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट या स्थानीय पुलिस को रिपोर्ट नहीं करते.

याचिका में एसओपी बनाने की मांग

दायर याचिका में केंद्र सरकार से एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) बनाने की मांग की गई है. इसमें सामग्री की पहचान और रिपोर्टिंग, संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसी को सूचना देने की समयसीमा, इलेक्ट्रॉनिक सबूत सुरक्षित रखने, आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल जानकारी जांच एजेंसियों के साथ साझा करने तथा पीड़ित बच्चों की सुरक्षा के उपाय शामिल करने की मांग की गई है.

बता दें कि,

सुप्रीम कोर्ट ने 23 सितंबर 2024 के अपने फैसले में कहा था कि इंटरमीडियरी को बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण एक्ट की धारा 19 से 21 और पॉक्सो नियमो के नियम 11 के अनुसार कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को एनसीएमइसी की रिपोर्ट करना आवश्यक है सुप्रीम कोर्ट ने सूचना प्रौद्योगिकी एक्ट की धारा 79 के तहत उपलब्ध ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा के संबंध में भी इन दायित्वों पर विचार किया था.

यह भी पढ़ें-‘कानून का असली मकसद सिर्फ नियम बनाना नहीं, बल्कि न्याय करना है’, स्वतंत्रता दिवस पर CJI सूर्यकांत ने दिया बड़ा संदेश

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read