Bharat Express DD Free Dish

‘कानून का असली मकसद सिर्फ नियम बनाना नहीं, बल्कि न्याय करना है’, स्वतंत्रता दिवस पर CJI सूर्यकांत ने दिया बड़ा संदेश

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि भारत लोकतंत्र, कानून के शासन, समानता और संवैधानिक मूल्यों के आधार पर लगातार आगे बढ़ रहा है.

स्वतंत्रता दिवस के मौके में सीजेआई सूर्यकांत ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि भारत लोकतंत्र, कानून के शासन, समानता और संवैधानिक सिद्धांतों के बल पर लगातार प्रगति कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल सीजेआई सूर्यकांत ने कहा देश की आजादी की लड़ाई और कानूनी पेशे के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया गया है.

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में कानून और वकीलों की अहम भूमिका रही है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें रुककर उन पुरुषों और महिलाओं को गहरे आभार के साथ याद करने के लिए प्रेरित करता है, जिन्होंने अपनी जान, अपनी मेहनत और अपने सपनों का बलिदान दिया, ताकि हमें आज का यह प्यारा भारत मिल सके. हम आज सुबह उन्ही के सम्मान और उनके बलिदान को श्रद्धांजलि देने के लिए यहां इकठ्ठा हुए है.

आजादी के संघर्ष में कानून ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

उन्होंने कहा कि आज का यह आयोजन इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि हमारी आजादी की लड़ाई का कानून से गहरा और स्थायी संबंध था. उस दौर के कुछ बेहतरीन कानूनी जानकारों की सोच और काम की वजह से ही हमें यह समझ आया कि कानून का असली मकसद सिर्फ आदेश देना या नियम बनाना नही, बल्कि न्याय करना, आजादी की रक्षा करना और इंसानी गरिमा को बनाए रखना है. सीजेआई ने कहा कि और इस बात को समझने के लिए हमें अपने आस-पास के लॉन से दूर जाने की जरूरत है.

सीजेआई ने याद दिलाई देश की यात्रा और भविष्य की जिम्मेदारियां

महात्मा गांधी और डॉक्टर बी आर अंबेडकर जैसे महान व्यक्तित्वों के उदाहरण देते हुए कहा कि उनका जीवन हमे याद दिलाया है कि कानूनी पेशा भारत की आजादी की लड़ाई में कोई मूक दर्शक नही था, बल्कि उसका एक हिस्सा था. सरदार वल्लभभाई पटेल, मोतीलाल नेहरू, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू, सी राजगोपालाचारी, चितरंजन दास और भूलाभाई देसाई समेत कई कानूनविदों ने देश के संवैधानिक भविष्य को आकार देने में योगदान दिया. सीजेआई ने मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों “हम कौन थे, क्या हो गए, और क्या होंगे अभी. आओ विचारें आज मिलकर, ये समस्याएँ सभी” का उल्लेख करते हुए देश की अब तक की यात्रा और आगे की जिम्मेदारियों पर विचार करने का संदेश दिया गया.

समारोह में युवा वकीलों को लेकर भी विशेष रूप से बात की गई. उन्होंने कहा कि आज के युवा अधिवक्ताओं के सामने प्रतिस्पर्धा, कठिन सीखने की प्रक्रिया और प्रैक्टिस स्थापित करने का दबाव पहले से अधिक है, लेकिन उनकी प्रतिभा, दृढ़ता और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता भविष्य के लिए भरोसा पैदा करती है. युवा वकीलों से कहा गया कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर से चली आ रही कानूनी पेशे की जिम्मेदारी अब धीरे-धीरे उनके कंधों पर आने वाली है.

ये भी पढ़ें: निवेशकों के पैसों से खरीदा बंगला और लग्जरी गाड़ियां, करोड़ों के पोंजी घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read