सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर और सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक नीरज कुमार और दिल्ली पुलिस के पूर्व एसीपी विनोद पांडेय को झटका लगा है. कोर्ट ने नीरज कुमार और विनोद पांडेय के खिलाफ दो आपराधिक मामले दर्ज करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने यह आदेश दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा 2006 में दिए गए आदेश के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए यह आदेश दिया है. जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस प्रसन्न वराले की पीठ ने यह आदेश दिया है.
कोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि यह न्याय के साथ गंभीर अन्याय है कि साल 2000 में दर्ज हुए ऐसे गंभीर आरोपों की पिछले 25 सालों तक जांच नही हो सकी. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि कभी-कभी जो जांच करते हैं, उन्हें भी जांच का सामना करना चाहिए, ताकि जनता का भरोसा सिस्टम पर बना रहे. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले की जांच एसीपी रैंक के अधिकारी करेंगे. कोर्ट ने तीन महीने में जांच को पूरा करने का आदेश भी दिया है.
जांच अधिकारी को हिरासत में पूछताछ की छूट
कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया है कि जांच के दौरान जांच अधिकारी को यह लगता है कि सवालों का सही जवाब नही दे रहे है, और इन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की आवश्यकता है तो नीरज कुमार की हिरासत में लेकर पूछताछ कर सकता है. कोर्ट ने कहा कि शुरुआती सीबीआई जांच में गड़बड़ी दिखी थी, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता. आरोपों में झूठे दस्तावेज तैयार करना, धमकाना और कोर्ट के आदेश की अवहेलना शामिल है. पूर्व आईआरएस अशोक अग्रवाल की यह बड़ी जीत मानी जा रही है. उनका मानना है कि इसके चलते उनके छोटे भाई को भी टॉर्चर किया गया. दरअसल दिल्ली हाई कोर्ट ने नीरज कुमार और विनोद पांडेय के खिलाफ दस्तवेज़ों के साथ छेड़छाड़ के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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