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सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर अजय शुक्ला को लगाई फटकार, जस्टिस बेला त्रिवेदी पर टिप्पणी वाला वीडियो हटाने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर अजय शुक्ला द्वारा जस्टिस बेला त्रिवेदी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर स्वत: संज्ञान लिया और वीडियो हटाने का आदेश दिया. सीजेआई ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित होती है, न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना जरूरी है.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी को लेकर टिप्पणी करने वाले यूट्यूबर अजय शुक्ला से सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया से वीडियो को हटाने का आदेश दिया है. सीजेआई बी. आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता से कोर्ट को सहायता करने को कहा है.

सीजेआई ने कहा इसमें कोई शक नहीं कि संविधान स्वतंत्र भाषण और अभिव्यक्ति की गारंटी देता है. लेकिन इस तरह के अधिकार पर उचित प्रतिबंध हैं और इस न्यायालय के न्यायाधीश के बारे में अपमानजनक आरोप लगाने या न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाले अवमाननापूर्ण आरोप लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती. हम रजिस्ट्री को अजय शुक्ला के खिलाफ स्वत: संज्ञान से अवमानना ​​के रूप में मामला दर्ज करने का निर्देश देते हैं.

अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सीमाएं भी ज़रूरी

यह मामला वरप्रद मीडिया के अजय शुक्ला द्वारा जस्टिस  बेला त्रिवेदी के खिलाफ टिप्पणियों का है, सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर मामले पर आदेश जारी किया है. सीजेआई ने कहा व्यापक रूप से प्रकाशित इस तरह के निंदनीय आरोपों से न्यायपालिका की अखंडता पर कलंक लगने की संभावना है. जस्टिस बेला त्रिवेदी 9 जून को रिटायर्ड हो रही है. वो लगभग साढ़े तीन साल से सुप्रीम कोर्ट की पीठ की हिस्सा है.

जस्टिस बेला त्रिवेदी की न्यायिक सफर की बात करें तो उन्होंने जुलाई 1995 में गुजरात के ट्रायल कोर्ट से अपने कैरियर की शुरुआत की उनका जन्म 10 जून 1960 को गुजरात के पाटन में हुआ था. उन्होंने गुजरात हाई कोर्ट में वकील के रूप में करीब 10 साल प्रैक्टिस की. 10 जुलाई 1995 को वो अहमदाबाद सिटी सिविल और सेशन्स कोर्ट की जज बनी. उन्होंने गुजरात हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार (विजिलेंस) और गुजरात सरकार में कानून सचिव के रूप में भी कार्य किया.

न्यायिक करियर की शुरुआत से सुप्रीम कोर्ट तक

17 फरवरी 2011 को वे गुजरात हाई कोर्ट की न्यायाधीश बनी. इसके बाद उन्हें रानास्थान हाई कोर्ट भेजा गया, जहां उन्होंने जून 2011 से फरवरी 2016 तक काम किया. इसके बाद गुजरात हाई कोर्ट वापस ट्रांसफर हो गया. फिर 32 अगस्त 2021 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बनी. ये इस समय फैसले देने के अलावे तब चर्चा में आई जब सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने उनका बिदाई समारोह ना करने का फैसला लिया.

जबकि सुप्रीम कोर्ट की परंपरा रही है कि किसी जस्टिस के रिटायर्ड होने पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन उन्हें विदाई देता है. लेकिन जस्टिस वेला त्रिवेदी के मामले में ऐसा नही हुआ. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए. एन रे का विदाई नही दी गई थी. उसके बाद दूसरे नंबर पर बेला त्रिवेदी है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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