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न्यायपालिका की छवि और सोशल मीडिया वायरल वीडियो! सुप्रीम कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग की नीति पर दिए बड़े संकेत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो के व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकने के लिए एक नई नीति बनाएगा.

Supreme Court Policy Live Streaming Video Commercial Use Court Proceedings
Edited by Vaibhav Gupta

सोशल मीडिया पर अदालती सुनवाई की छोटी-छोटी क्लिप्स काटकर उन्हें वायरल करने और उनसे कमाई करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. इसी गंभीर मुद्दे पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि वह कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और उसके वीडियो के कमर्शियल इस्तेमाल को लेकर एक स्पष्ट नीति तैयार करेगा. मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इस पूरे मामले की सुनवाई कर रही है. अदालत का मानना है कि सुनवाई के चुनिंदा हिस्सों को संदर्भ से हटकर दिखाने से कई बार न्यायपालिका की छवि पर असर पड़ता है, जिस पर रोक लगाना बेहद जरूरी है.

तकनीकी सुरक्षा और वकीलों के सुझाव

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि इस संबंध में कुछ अहम सुझाव मिले हैं, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पास भेज दिया गया है. वहीं, जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने सुझाव दिया कि कोर्ट की एक आधिकारिक वेबसाइट होनी चाहिए, जहां सुनवाई की रिकॉर्डिंग वाटरमार्क के साथ सुरक्षित रूप से उपलब्ध कराई जाए.

जस्टिस बागची ने कहा कि तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर ऐसे पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं जिससे कोई भी व्यक्ति वीडियो की रिकॉर्डिंग निकालकर उसका दुरुपयोग न कर सके. उन्होंने यह भी संकेत दिए कि भविष्य में वीडियो के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल से अनुमति लेना अनिवार्य किया जा सकता है. एसजी तुषार मेहता ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि आज-कल कई यूट्यूबर इस तरह के काम जनहित के नाम पर नहीं बल्कि सिर्फ अपने फायदे के लिए कर रहे हैं.

मीडिया रिपोर्टिंग पर नहीं पड़ेगा कोई असर

इससे पहले कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो के बेरोकटोक प्रसारण पर अंतरिम रोक लगाई थी. वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने भी अदालत में माना कि हालांकि उन्हें लाइव स्ट्रीमिंग से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जिस तरह से जजों की टिप्पणियों के वीडियो को सोशल मीडिया पर मजाक का विषय बनाया जा रहा है, वह चिंताजनक है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस पूरी नीति और आदेश का अखबारों या न्यूज चैनलों की पत्रकारिता और रिपोर्टिंग पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. कोर्ट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की न्याय व्यवस्था की गरिमा बनी रहे और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अदालती फुटेज का गलत इस्तेमाल पूरी तरह से रोका जा सके.

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-भारत एक्सप्रेस



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