कावेरी जल विवाद मामले में तमिलनाडु सरकार की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 3 सप्ताह बाद सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वकील ने अतिरिक्त दस्तावेज और जमा करने के लिए समय की मांग की, जिसे कोर्ट ने दे दिया.
जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच कावेरी जल विवाद मामले में दायर तमिलनाडू सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही है. जस्टिस विक्रमनाथ ने मामले की सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन से पूछा कि यह याचिका अनुच्छेद 32 के तहत क्यों दायर की.
याचिका को खारिज करने की मांग
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कर्नाटक सरकार से पूछा था कि क्या आपने सीडब्ल्यूएमए के आदेशों का पालन किया है? सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार ने कहा था कि आज सुबह 8 बजे तक 12607 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से कहा था कि उन्होंने ज्यादा पानी छोड़ा है. अब आपको कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए.
सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को यह भी बताया था कि हमने मेकेदातु में एक बांध बनाने का प्रस्ताव दिया है. कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर तमिलनाडु सरकार के आरोपों को गलत बताते हुए याचिका खारिज करने की मांग की है.
तमिलनाडु सरकार की मांग निरर्थक: कर्नाटक सरकार
कर्नाटक ने तमिलनाडू सरकार और डीएमके की पानी छोड़ने की मांग वाली याचिकाओं का विरोध किया है. कर्नाटक सरकार के मुताबिक CWMA ने 30 जुलाई को 15 दिनों तक रोजाना 3500 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया था. कर्नाटक सरकार ने कहा है कि 29 जुलाई से 10 अगस्त के बीच जलाशयों से 1,64,080 क्यूसेक पानी छोड़ा गया.
कर्नाटक के अनुसार 86, 797 क्यूसेक पानी बिलिगुंदुलु गेजिंग स्टेशन तक पहुंचा. सरकार ने यह भी कहा है कि CWMA के आदेश का पूरी तरह पालन हो चुका है. लिहाजा तमिलनाडु सरकार की मांग निरर्थक है.
पूरी तरह से लागू हो निर्देश
दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि कर्नाटक ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और कावेरी जल विनियमन समिति के आदेशों का पालन नही किया है. डीएमके की ओर से दायर याचिका में कहा कि कर्नाटक राज्य को निर्देश दिया जाए कि वह सीडब्ल्यूआरसी के 28 जुलाई 2026 के निर्देश को तुरंत और पूरी तरह से लागू करें.
कावेरी जल विनियमन ने 28 जुलाई को कावेरी बेसिन की जलवैज्ञानिक और मौसम संबंधी स्थितियों का आकलन करने के बाद कर्नाटक को निर्देश दिया था कि वह कृष्ण राजा सागर और काबिनी जलाशयों से पानी छोड़कर 29 जुलाई से 12 अगस्त 2026 तक बिलिगुंडलू में 3500 क्यूसेक जल की निकासी सुनिश्चित सीडब्ल्यूआरसी की 54वीं आपातकालीन बैठक में मंजूरी मिली थी.
क्या है पूरा मामला?
वहीं कावेरी नदी के पानी को लेकर तमिलनाडु में किसानों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. किसान नेता अय्या कन्नू के नेतृत्व में किसानों ने तिरुचिरापल्ली में कावेरी नदी के किनारे रेत में खुद को दबाकर अनोखा प्रदर्शन किया. बता दें कि 2018 में केंद्र ने तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के बीच नदी के पानी के बंटवारे के विवाद को सुलझाने के लिए कावेरी वाटर मैनेजमेंट ऑथोरिटी बनाई थी. नदी किनारे बसे राज्य के.सदस्यों के अलावा बोर्ड में केंद्र का एक नॉमिनी भी होता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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