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सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों द्वारा नियमित डीजीपी की नियुक्ति नहीं करने पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों द्वारा नियमित डीजीपी की नियुक्ति में की जा रही देरी पर सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने कहा कि कार्यवाहक और एडहॉक डीजीपी की परंपरा से योग्य व वरिष्ठ अधिकारियों को अवसर नहीं मिल पाता, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित होती है.

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सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के डीजीपी की नियुक्ति के प्रस्ताव को भेजने में हो रही देरी पर चिंता जताई है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि उसे राज्यों के चक्कर में नही पड़ना चाहिए, क्योंकि उन्हें कभी भी नियमित डीजीपी पसंद नही आता, वे कोई कार्यवाहक डीजीपी, एडहॉक डीजीपी चाहते है और उन्हें यह सूट करता है.

कोर्ट ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से योग्य और वरिष्ठ अधिकारियों के डीजीपी के पद के लिए चयन का उचित अवसर नही मिल पाता. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एक्टिंग नियुक्तियां करके राज्य सरकारें तय प्रक्रिया से बचने की कोशिश करती है. जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर असर पड़ता है.

डीजीपी नियुक्ति में लापरवाही पड़ेगी भारी

सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रथा को खत्म करने पर जोड़ दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हम यूपीएससी को यह अधिकार देते है कि वह राज्यों को संबंधित डीजीपी की सिफारिशों के लिए समय पर प्रस्ताव भेजने के लिए लिखें. कोर्ट ने कहा कि जब ऐसे प्रस्ताव नही भेजे जाते है तो यूपीएससी प्रकाश सिंह मामले में आवेदन दायर कर सकती है. यह कहने की जरूरत नही है कि संबंधित राज्यों की जवाबदेही सहित आवश्यक परिणाम भुगतने होंगे.

कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान यूपीएससी ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने डीजीपी के चयन में बहुत ज़्यादा देरी की है. उन्होंने कहा कि पिछले डीजीपी अनुराग शर्मा 2017 में रिटायर्ड हो गए थे और उसके बाद राज्य ने यूपीएससी को कोई सिफारिश नही भेजी.

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

राज्य सरकार ने आखिरकार अप्रैल 2025 में एक सिफारिश भेजी थी, लेकिन यूपीएससी ने कोई कार्रवाई नही की. कोर्ट ने कहा कि यूपीएससी को जल्द पैनल समिति की बैठक बुलानी चाहिए और तेलंगाना राज्य के लिए डीजीपी की नियुक्ति के लिए जल्द से जल्द सिफारिश करनी चाहिए. कोर्ट ने यूपीएससी को जरूरी काम करने के लिए चार सप्ताह का निर्देश दिया कि अगर राज्य सरकार समय पर प्रपोजल जमा नहीं करती है, तो यह प्रकाश सिंह मामले में अर्जी दाखिल करें.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश के मुताबिक किसी राज्य में डीजीपी या पुलिस बल के प्रमुख की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा यूपीएससी द्वारा शॉर्टलिस्ट किए गए तीन अधिकारियों के पैनल में से की जाती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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