ताज ट्रेपेजियम जोन में हो रही पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर साफ कर दिया कि इसको लेकर 2015 में जारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश लागू रहेगा. कोर्ट ने कहा कि 5 किलोमीटर से अधिक दूरी पर टीटीजेड के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई के लिए सीईसी के अधिकारी की अनुमति जरूरी है.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारी उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों से बंधे होंगे. इसके साथ ही कोर्ट ने ट्रस्ट की ओर से दायर अर्जी को खारिज कर दिया है. दायर अर्जी में आगरा में निजी भूमि पर पेड़ों की कटाई के लिए पूर्व अनुमति प्राप्त करने की शर्तों में छूट मांगी थी.
अदालत ने ट्रस्ट की अर्जी खारिज की
बता दें कि टीटीजेड लगभग 10,400 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र है, जो उत्तर प्रदेश में आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस व एटा और राजस्थान के भरतपुर जिलों में फैला हुआ है. अदालत ने 1996 में टीटीजेड में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण का निर्देश दिया था. इसके अतिरिक्त इसने 200 से अधिक प्रदूषणकारी उद्योगों को बंद करने या स्थानांतरित करने का आदेश दिया था और सीएनजी या एलपीजी जैसे स्वच्छईंधन पर स्विच करने का आदेश दिया था.
पिछली सुनवाई में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा था कि निगरानी का काम या तो केंद्र की अधिकार प्राप्त समिति कर सकती है या फिर राज्य का वन विभाग. न्याय मित्र एवं वरिष्ठ वकील एडीएन राव ने सुझाव दिया कि पेड़ कटाई के लिए संबंधित एसएचओ को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.
इसपर पीठ ने कहा था कि ऐसा कर सकते हैं, लेकिन अभी मौजूदा पेड़ों का कोई आकंड़ा उपलब्ध नहीं है. इसके बाद पीठ ने कहा था कि जब तक पेड़ों की गणना नहीं कि जाती, तब तक इस मुद्दे का समाधान नहीं होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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