सुप्रीम कोर्ट ने रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार रूपनगर रेंज के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को राहत देने से इनकार कर दिया है. जिसके बाद भुल्लर ने दायर जमानत याचिका को वापस ले लिया है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह अनुमति दी है. कोर्ट ने कहा कि इस स्टेज पर दखल नही दे सकता.
सीजेआई ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें कुछ कहने पर मजबूर मत कीजिए. आप पहले से वही है, आपके पास वकीलों की पूरी फौज है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से कहा कि पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में मामला लंबित है, वहां अपनी बात रखें. जिसपर भुल्लर के वकील ने कहा कि हाई कोर्ट ने जनवरी की तारीख लगा रखी है. लिहाजा अंतरिम राहत दी जाए, लेकिन कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है.
भुल्लर ने हाई कोर्ट में दी चुनौती
भुल्लर ने सीबीआई के क्षेत्राधिकार सहित कई मांगो को लेकर हाई कोर्ट का रुख किया है, जिसपर हाई कोर्ट सुनवाई कर रहा है. भुल्लर का कहना था कि पंजाब में सीबीआई को केस दर्ज करने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी है, लेकिन बिना मंजूरी के ही सीबीआई ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. इसलिए सीबीआई जांच का अधिकार नही है. लिहाजा सीबीआई द्वारा दर्ज मुकदमे को रद्द किया जाए. भुल्लर ने अंतरिम राहत के लिए जमानत की मांग की है. साथ ही दर्ज मामले पर रोक लगाने की मांग की थी. लेकिन हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत न देते हुए एक महीने के बाद सुनवाई की तारीख दी थी. शिकायत के अनुसार भुल्लर ने कारोबारी के खिलाफ एक फर्जी मुकदमा दर्ज किया था और उसे खत्म करने के लिए 8 लाख रुपये की मांग की थी.
सीबीआई ने 16 अक्टूबर को इस मामले में बिचौलिए कृष्णु शारदा के साथ भुल्लर को गिरफ्तार किया था.
वह मंडी गोविंदगढ़ के एक कारोबारी से रिश्वत मांग रहे थे. इस मामले में सीबीआई भुल्लर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. गिरफ्तारी के 13 दिन बाद भुल्लर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज हुआ था.
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