Bharat Express DD Free Dish

मॉब लिंचिंग और गौ रक्षकों द्वारा भीड़ हिंसा के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार, पढ़ें पूर मामला

सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग और गौ रक्षकों द्वारा हिंसा के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी. कोर्ट ने कहा कि वह पूरे देश में घटनाओं की निगरानी नहीं कर सकता और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए.

Telangana News, Supreme Court, OBC Reservation

मॉब लिंचिंग और गौ रक्षकों द्वारा भीड़ हिंसा के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विनोद चन्द्रनकी पीठ ने यह फैसला दिया है. यह याचिका नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमेन की तरफ याचिका दायर की गई थी. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हम एक-एक घटना की निगरानी नहीं कर सकते.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी मामले में अगर पुलिस ठीक से काम नही कर रही, तो इसे आला अधिकारियों, निचली अदालत या हाई कोर्ट में रखा जा सकता है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है. याचिका में कहा गया था कि दिल्ली में बैठकर हम देश के विभिन्न क्षेत्रों में मुद्दों की निगरानी नहीं कर सकते.

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि बीएनएस के तहत भी इसे अपराध घोषित किया गया है. कानून को अपना काम करने देना चाहिए. कोर्ट ने यह भी कहा कि लोग अलग-अलग मांगो को लेकर सुप्रीम कोर्ट आ जाते है. एसजी तुषार मेहता ने यह भी कहा कि जब घटनाएं होती है तो राज्य सरकार का यह कर्तव्य है कि यह सुनिश्चित करें कि ऐसा ना हो और उन लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाये.

पीड़ितों के लिए कानूनी विकल्प

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि जब राज्य सरकारें एफआईआर दर्ज नही कर रही हैं तो क्या किया जाए. राज्यों में ये एक पैटर्न उभर रहा है. इस पर कोर्ट ने कहा कि ऐसे में पीड़ित को पहले उचित ऑथोरिटी के पास जाना चाहिए. वैसे भी हर राज्यों में परिस्थितियां अलग होती है. कोर्ट ने कहा कि अगर तहसीन पूनावाला फैसले का पालन नहीं किया जाता है तो पीड़ित के पास कानूनी विकल्प मौजूद है.

कोर्ट ने यह भी कहा कि यहां बैठकर हम देश भर की निगरानी नहीं कर सकते और हमारे विचार में इस अदालत आ इस तरह की मॉनिटरिंग संभव नही है. अगर कोई पीड़ित हैं तो कानून के तहत अदालत जा सकता है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि गौ रक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा में बढ़ोतरी हुई है. याचिका में असम, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार में हुई हिंसा की घटनाओं का हवाला दिया गया था.

ये भी पढ़ें: Lottery Tax पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला, कहा-सिर्फ राज्य सरकार ही लॉटरी पर लगा सकती है टैक्स

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read