सुप्रीम कोर्ट ने बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 को रद्द करने से संबंधित दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई नही कर सकते है. क्योंकि यह याचिका अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है. कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका पर हम परमादेश कैसे जारी कर सकते है.
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पटना हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है. याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी थी कि यह अधिनियम संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और इसे निरस्त किया जाना चाहिए. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई मुद्दा उठाने के लिए हाई कोर्ट उपयुक्त जगह है.
याचिकाकर्ता ने संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया
याचिका में बौद्धों की आस्था और धार्मिक अधिकारों का सम्मान करते हुए महाविहार का प्रबंधन बौद्धों को सौपने की मांग की गई थी. 1949 के बोधगया मंदिर अधिनियम ने बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति की स्थापना की, जिसमें चार बौद्ध और चार हिंदू सदस्य शामिल हैं, और गया जिला मजिस्ट्रेट इसके पदेन अध्यक्ष हैं. ऐतिहासिक रूप से अधिनियम में यह प्रावधान था कि अध्यक्ष हिंदू होना चाहिए, जिसे 2013 में संशोधित कर गैर-हिंदू जिला मजिस्ट्रेट को भी अध्यक्ष बनाने की अनुमति दी गई.
हालांकि अखिल भारतीय बौद्ध फोरम जैसे बौद्ध समूहों का कहना है कि यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 25, अनुच्छेद 26, अनुच्छेद 29 और अनुच्छेद 30 का उल्लंघन करता है, जो धार्मिक मामलों को बिना किसी बाधा के प्रबंधन करने का अधिकार सुनिश्चित करता है.
मामले में अरबों की संपत्ति और विरासत की लूट का भी आरोप
अधिवक्ता आनंद जोंधले के अनुसार यह मामला सिर्फ कानूनी प्रावधानों तक सीमित नहीं है, बल्कि अरबों-खरबों के घोटाले और बौद्ध विरासत की लूट से जुड़ा है. महाबोधि मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक 13वीं शताब्दी तक मंदिर का प्रबंधन बौद्ध धर्म मानने वालों के हाथ में था. लेकिन तुर्क आक्रमणकारियों के आगमन के बाद और 1590 में घमंडी गिरी नाम के एक सन्याशी के गया पहुचने तक इसका प्रबंधन किसके हाथ में था इसका पता नहीं चल पाया है.
बता दें कि महंत घमंड गिरी ने बोधगया मठ की स्थापना की. इसके बाद यह एक हिंदू मठ बन गया. गिरी के वंशज आज भी महाबोधि मंदिर के प्रबंधन में शामिल हैं. वो इसे एक हिंदू धार्मिक स्थल बताते है. वो गौतम बुद्ध को भगवान विष्णु का 9 वां अवतार मानते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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