सुप्रीम कोर्ट ने 49 करोड़ रुपए के ठगी के मामले में आरोपियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. दायर याचिका में निवेशकों से ठगी के मामले में अलग-अलग राज्यों में दर्ज प्राथमिकी को एक साथ जोड़ने की मांग की गई थी. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने दायर याचिका पर यह निर्देश दिया है. कोर्ट मामले में आरोपी उपेंद्र नाथ मिश्रा और काली प्रसाद मिश्रा की ओर से दायर ट्रांसफर याचिका पर यह फैसला दिया है.
इन दर्ज प्राथमिकियों में निवेशकों से कथित तौर पर 49 करोड़ की ठगी का मामला दर्ज है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वित्तीय अपराध के पीड़ित अक्सर न्यायिक प्रक्रिया में अदृश्य होते है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अमन लेखी से पूछा कि क्या उन्हें सिर्फ आरोपियों को फायदा पहुचाने के लिए अलग-अलग राज्यों में यात्रा करना सही होगा. कोर्ट के कड़ा रुख के बाद याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दायर याचिका को वापस ले लिया है.
आरोपियों के खिलाफ ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और आंध्र प्रदेश सहित कुल सात राज्यों में आपराधिक मुकदमे चल रहे है. बचाव पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अमन लेखी ने कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि त्वरित सुनवाई के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी के मामलों में कई एफआईआर को एक साथ जोड़ने की अनुमति दी गई थी. लेकिन सीजेआई सूर्यकांत ने उनकी इन दलीलों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.
आरोपियों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने आरोपियों से पूछा, क्या यह न्यायसंगत है कि आपके अपराध का शिकार बने लोगों को सिर्फ आपकी सुविधा के लिए अलग-अलग राज्यों से किसी एक जगह आने से मजबूर किया जाए. वही जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि धोखाधड़ी, जालसाजी और साजिश का हर एक आरोप पूरी तरह से अलग और स्वतंत्र अपराध है. जस्टिस बागची ने पूछा कि आखिरकार इन अपराधों के पीड़ितों को क्यों भुगतान पड़े.
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-भारत एक्सप्रेस
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