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सत्य निकेतन हादसा: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली हाईकोर्ट में ही जारी रहेगी सुनवाई; हॉस्टल-कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा पर सख्त रुख

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई को अपने पास ट्रांसफर नहीं करेगा.

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सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा मामले में चल रही सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपना रुख को साफ कर दिया है. कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों को सुनने के बाद स्पष्ट किया है कि वह इसको लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई को अपने पास ट्रांसफर नही करेगा. क्योंकि इस मामले में दायर याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है.

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि मौजूदा स्थिति में बदलाव नही करना चाहते हैं और दिल्ली हाई कोर्ट समय-समय पर निगरानी करता रहेगा. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में कॉलेज और विश्वविद्यालयों के आसपास चल रहे पीजी हॉस्टल, निजी हॉस्टल और छात्रावासों की सुरक्षा को लेकर व्यापक स्तर पर निगरानी करेगा.

छात्रावासों की समयबद्ध सुरक्षा जांच की जरूरत

मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी अजित कुमार सिन्हा ने अपनी रिपोर्ट को दाखिल कर दिया है. दाखिल रिपोर्ट में ऐसे सभी छात्र आवासों की समयबद्ध सुरक्षा की जांच कराने की जरूरत बताई गई है.जांच में भवन का स्वीकृत नक्शा, निर्माण, बेसमेंट, जमीन के इस्तेमाल, इमारत की मजबूती, अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन रास्तों जैसे पहलुओं को शामिल करने की बात कही गई है.

मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को यह भी बताया कि सत्य निकेतन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यवाही सही दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो चुकी है और कुछ अनधिकृत ढांचों को गिराने की कार्रवाई भी की गई है.

एमिकस क्यूरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देश केवल पीजी आवासों तक सीमित नही थे. कोर्ट के निर्देशों में अवैध निर्माण और जमीन के दुरुपयोग जैसे व्यापक मुद्दे भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इसी तरह के नियमों के उल्लंघन की स्थिति जिम, कोचिंग सेंटर और बीपीओ समेत अन्य प्रतिष्ठानों में भी हो सकती है.

एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि निरीक्षण के दौरान सैदुलाजाब इलाके में ऐसी इमारतें भी मिली, जहां करीब 500 लोग काम कर रहे थे. इसपर जस्टिस अमानुल्लाह ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि लोगों को एक कमरे में सैकड़ों की संख्या में ठूंसकर रखा जाता है. उन्होंने सवाल किया गया क्या ऐसे भवन इतने लोगों का भार और उपयोग सहने में सक्षम है और वहां पर्याप्त प्रवेश और निकास की व्यवस्था तक नही होती.

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-भारत एक्सप्रेस



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