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NEET UG Case: ‘प्राइवेट की फीस सरकारी जैसी नहीं हो सकती’, सुप्रीम कोर्ट ने छात्र को दिया झटका

Supreme Court NEET UG Case: नीट-यूजी के ईडब्ल्यूएस वर्ग के छात्रों को SC से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने राजस्थान के एक छात्र की याचिका को खारिज करते हुए साफ कह दिया कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस को सरकारी कॉलेजों के बराबर नहीं किया जा सकता.

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Edited by Shubhra Rai

 Supreme Court NEET UG Case: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के नीट-यूजी छात्र हर्षवर्धन सिंह को राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने राजस्थान ईडब्ल्यूएस क्राइटेरिया को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस बी.वी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि निजी शैक्षणिक संस्थानों की अधिक फीस की तुलना सरकार से नहीं कि जा सकती, इसलिए ईडब्ल्यूएस के आठ लाख की आय सीमा के मानदंडों में हस्तक्षेप को कोई आधार नहीं है.

कोर्ट द्वारा याचिका खारिज

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हमें हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई कारण नहीं दिख रहा है. यही कहते हुए कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है. लेकिन कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि अगर कानून से जुड़ा कोई सवाल हो, तो उसे खुला रखा गया है.

सालाना आय सीमा अधिकतम 8 लाख रुपए तय

कोर्ट ने याचिकाकर्ता हर्षवर्धन सिंह की ओर से पेश वकील से कहा कि अगर आप फीस नहीं भर सकते, तो स्कॉलरशिप लें. जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि सेल्फ फाइनेंसिंग कॉलेजों को सरकारी कॉलेजों की तरह फीस लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता.

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी का लाभ पाने के लिए परिवार की सालाना आय सीमा अधिकतम 8 लाख रुपए तय है. ऐसे में ईडब्ल्यूएस वर्ग के छात्रों से 18 से 25 लाख रुपए सालाना फीस मांगना पूरी तरह से अतार्किक है. दायर याचिका में कहा गया था कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की ट्यूशन फीस (जो सालाना 18.9 से 25 लाख रुपए के बीच है) ईडब्ल्यूएस के लिए तय आठ लाख रुपए की आय सीमा के बिल्कुल उलट है.

फीस स्ट्रक्चर कानूनी रूप से सही

दायर याचिका में यह भी कहा गया था कि ईडब्ल्यूएस कोटा के लिए 8 लाख रुपए की सालाना आय की सीमा प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की 25 लाख रुपए तक की सालाना फीस के साथ कैसे मेल खाती है. इससे पहले राजस्थान हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के लिए तय फीस स्ट्रक्चर कानूनी रूप से सही है. क्योंकि इसे राज्य की फीस रेगुलेटरी कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करते हुए तय किया था.

स्कॉलरशिप या सब्सिडी लें

हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि आप यह नहीं कह सकते कि प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टिट्यूटशन भी सरकारी इंस्टिट्यूटशन जितनी ही फीस ले, ऐसा नहीं हो सकता. कोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति आकर यह नहीं कह सकता कि प्राइवेट कॉलेजों की फीस बहुत ज्यादा है. इसलिए उसे सरकारी कॉलेज जैसा कर दिया जाए.

ये सेल्फ-फाइनेंसिंग इंस्टिट्यूट हैं, सरकारी कॉलेजों को राज्य से ग्रांट मिलती है , दोनों में बहुत बड़ा अंतर है. कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा किया गया तो मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में राज्य को प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों से मिलने वाली मदद बंद हो जाएगी. कोर्ट ने कहा कि हमें डॉक्टरों की जरूरत है. अगर आप फीस नहीं भर सकते तो स्कॉलरशिप या सब्सिडी लें.

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-भारत एक्सप्रेस 



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