सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में फूड सेफ्टी टास्क बनाने को लेकर बड़ा फैसला दिया है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने फूड सेफ्टी टास्क बनाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि याचिका में नेशनल टास्क के गठन करने का कोई आधार नही बताया गया है और ना ही दायर याचिका में कोई मेरिट है. लिहाजा याचिका को खारिज किया जाता है.
दायर याचिका में मांग की गई थी कि पूरे देश में फूड सेफ्टी की निगरानी और सुधार के लिए एक नेशनल टास्क फोर्स का गठन किया जाए. यह याचिका डॉक्टर के. ए पॉल ने दायर किया था. जिसपर सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाते हुए कहा था कि केवल सामान्य और व्यापक आरोपों के बजाए ठोस शोध और तथ्य प्रस्तुत किए जाने चाहिए. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि अदालत आने से पहले जमीनी स्तर पर कितनी रिसर्च की है. याचिकाकर्ता की दलील थी कि यह मामला देश के लगभग हर नागरिक के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है.
बाजार में खाद्य सुरक्षा की समस्या
दायर याचिका में कहा गया था कि भारतीय बाजार में असुरक्षित, मिलावटी और खतरनाक खाद्यय पदार्थो की भरमार है, जिससे पता चलता है कि वर्तमान में लागू नियम नाकाफी है. इसके साथ ही यह भी कहा गया था कि एक केंद्रीकृत टास्क फोर्स बनने से निगरानी बेहतर होगी और नियमों का सख्ती से पालन कराया जा सकेगा. फूड सेफ्टी से जुड़े मामलों की निगरानी पहले से ही कई सरकारी एजेंसियों और संस्थाओं द्वारा की जा रही है.
देश में खाद्यय सुरक्षा और मानकों को लागू करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के पास है.
दायर याचिका में अधिकारियों को खाद्य निर्माण और प्रसंस्करण इकाइयों, रेस्तरां और वाणिज्यिक खाद्य प्रतिष्ठानों और अन्य को शामिल करते हुए राष्ट्रव्यापी और समयबद्ध खाद्य सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण अभियान चलाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था.
-भारत एक्सप्रेस
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