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‘हम वकीलों से दुश्मनी नहीं चाहते, उनके मित्र हैं…’ सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा ऐसा? जनहित याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने समयबद्ध तरीके से मामलों के निपटारे के लिए एक समान राष्ट्रीय केस फ्लो प्रबंधन नीति बनाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया.

SUPREME COURT

समयबद्ध तरीके से मामलों के निपटारे के लिए दिशानिर्देश जारी करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए यह खारिज कर दिया है.

जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा हम वकीलों से दुश्मनी नही रखना चाहते हैं हम वकीलों के मित्र है. कोर्ट ने ये बाते हल्के फुल्के अंदाज में कही. दायर याचिका में देश के सभी न्यायालयों पर लागू होने वाली एक समान राष्ट्रीय केस फ्लो प्रबंधन नीति के निर्माण और कार्यान्वयन की भी मांग की गई थी. जिसमें कार्यवाही के लिएचरणबद्ध समय सीमा, स्थगन का नियमन, उचित मामलों में निरंतर, दैनिक सुनवाई और लंबे समय से लंबित और पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की मांग की गई थी. कोर्ट ने कहा कि सभी मामलों की प्रकृति अलग-अलग होती है, इसलिए उनके निपटारे के लिए एक समान समय सीमा तय करना व्यवहारिक नहीं है.

यह जनहित याचिका एक वकील की ओर से दायर की गई थी. जिसमें अदालतों को समयबद्ध तरीके से फैसले देने के लिए विशेष दिशा निर्देश बनाने की मांग की गई थी. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाई कोर्ट्स में लंबित जमानत याचिकाओं का जल्द निपटारे को लेकर दिशा निर्देश जारी किया है. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि अब जमानत मामलों की सुनवाई साप्ताहिक या अधिकतम पखवाड़े के आधार पर अनिवार्य रूप से सूचीबद्ध की जाए, ताकि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित हो सके.

जमानत मामलों में तेजी लाने के लिए प्रक्रिया में बदलाव का निर्देश

कोर्ट्स ने कहा कि हाई कोर्ट्स में जमानत याचिकाओं को स्वतः हर दो सप्ताह में सूचीबद्ध करने की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए. साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि नई जमानत याचिकाओं को वैकल्पिक दिनों में या अधिकतम एक सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करें. कोर्ट ने देश के सभी राज्य सरकारें और केंद्र सरकार से कहा है कि जमानत मामलों में अनावश्यक और सामान्य तौर पर सुनवाई टालने की मांग अब स्वीकार नही किया जाएगा. कोर्ट ने यह भी अनिवार्य किया है कि जमानत याचिका पर सुनवाई से पहले संबधित पक्षों द्वारा स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल किया जाए. साथ ही याचिकाकर्ता के वकील को अपनी जमानत याचिका की प्रति एडवोकेट जनरल कार्यालय या नामित सरकारी एजेंसी को पहले से उपलब्ध करानी होगी.

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत याचिका पर प्रारंभिक स्तर पर नोटिस जारी करने की मौजूदा प्रक्रिया को समाप्त किया जाना चाहिए, ताकि सुनवाई में देरी न हो. जिन मामलों की सुनवाई तय तारीख पर नहीं हो पाती, उन्हें स्वतः दोबारा सूचीबद्ध करने की व्यवस्था भी लागू करने का निर्देश दिया गया है. अदालत ने हाई कोर्ट्स से यह भी कहा कि वे मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करें.

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-भारत एक्सप्रेस



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