Delhi Riots UAPA Case: सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों से संबंधित यूएपीए मामले में आरोपी शरजील ईमाम, गुलफिशा फातिमा सहित अन्य की ओर से दायर जमानत याचिका पर जवाब दाखिल नही करने पर दिल्ली पुलिस को आड़ें हाथ लिया है. जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील को फटकार लगाते हुए कहा पूछा कि अभी तक जवाब दाखिल क्यों नही किया.
कोर्ट ने कहा हमने पिछले दिनों ही स्पष्ट किया था कि सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी और उस दिन निपटारा किया जाएगा. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सभी जमानत मामलों में जवाब दाखिल करने का सवाल ही नही उठता. वही सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने आज जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांगा था. कोर्ट 31 अक्टूबर को अगली सुनवाई करेगा.
आरोपियों की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल से कहा कि आप शायद पहली बार पेश हो रहे हैं, हमने पर्याप्त समय दिया है. यह जमानत याचिका शरजील इमाम, उमर खालिद, मीरान हैदर, और गुलफिशा फातिमा ने दायर की है. दिल्ली हाई कोर्ट ने शरजील इमाम सहित 9 आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया था. यह जमानत याचिका शरजील ईमाम, उमर खालिद, मोहम्मद सलीम खान, शिफा उर रहमान, अतहर खान, मीरान हैदर, खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा ने दायर की थी.
इसके अलावा केस में कुल 17 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें ताहिर हुसैन, इशरत जहां, आसिफ इकबाल तन्हा, सैफुरा जरगर, फैजान खान, नताशा नारवाल और अन्य नाम शामिल है.
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“UAPA मामलों में देरी के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती”
मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े यूएपीए मामलों में मुकदमे में देरी के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती है. वही याचिककर्ताओ की ओर से पेश वकीलों ने कहा था कि मुकदमा लंबा खींच गया है और अभी तक आरोप भी तय नहीं हुए हैं.
एसजी मेहता ने कहा था कि यह कोई सामान्य जमानत याचिका नहीं है, बल्कि सुनियोजित और संगठित दंगे का मामला है, जिसका उद्देश्य भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुचाना था. उन्होंने आरोप लगाया जो इमाम और खालिद ने जानबूझकर उस दिन को चुना जिससे अशांति फैले और भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदनाम किया जा सके.
एसजी मेहता ने यह भी कहा था कि अगर कोई राष्ट्रविरोधी स्तर पर ऐसी हरकत करता है, तो उसे जमानत का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने यह भी कहा था कि दिल्ली दंगों की जांच अब तक कि सबसे बेहतरीन जांचों में भी एक है और धारा 164 के तहत 58 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं. यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक घायल हुए थे. दंगों में मारे गए लोगों में 38 मुस्लिम और 15 हिंदू थे.
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– भारत एक्सप्रेस
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