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‘बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं चलेगा’, गोद लेने में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; CARA और केंद्र सरकार को लगाई फटकार

Supreme Court Adoption Case: सुप्रीम कोर्ट ने भारत में गोद लेने की प्रक्रिया में हो रही देरी और अत्यधिक कागजी कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए CARA और केंद्र सरकार को फटकार लगाई है.

Supreme Court Adoption Case

Edited by Sahil Singh

Supreme Court Adoption Case: सुप्रीम कोर्ट ने भारत में गोद लेने की प्रक्रिया में हो रही अनावश्यक देरी और नौकरशाही अड़चनों पर केंद्र सरकार तथा केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) को कड़ी फटकार लगाई है. अदालत ने कहा कि अत्यधिक कागजी प्रक्रियाएं और प्रशासनिक बाधाएं बच्चों के हितों के खिलाफ हैं और इससे केवल मामलों में अनावश्यक देरी होती है.

अमेरिकी महिला ले रही थी गोद

जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक अमेरिकी निवासी महिला अपने माता-पिता को खो चुके भांजे/भांजी को गोद लेना चाहती है. सीएआरए द्वारा उसकी गोद लेने की अर्जी खारिज किए जाने के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

सुनवाई के दौरान पीठ ने सीएआरए की ओर से पेश वकील से सवाल किया कि जब एक करीबी रिश्तेदार बच्चे को अपनाने के लिए तैयार है तो उसकी राह में बाधाएं क्यों खड़ी की जा रही हैं. अदालत ने कहा कि रिश्तेदार द्वारा गोद लेने के मामलों में भी अनावश्यक आपत्तियां और प्रक्रियात्मक अड़चनें पैदा करना समझ से परे है.

नौकरशाही को लगाई फटकार

कोर्ट ने नौकरशाही की ‘रेड टेपिज्म’ यानी अनावश्यक कागजी अड़चनों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इससे केवल प्रक्रिया बाधित होती है. न्यायाधीशों ने संकेत दिया कि ऐसी प्रवृत्ति बच्चों के भविष्य और उनके पुनर्वास से जुड़े मामलों में स्वीकार्य नहीं हो सकती.

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि अमेरिकी सरकार से प्राप्त गोद लेने की अनुमति 20 जुलाई को समाप्त होने वाली है. ऐसे में मामले की तत्काल सुनवाई आवश्यक है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को 13 जुलाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया और सीएआरए को निर्धारित समयसीमा के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा.

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारियों की ओर से होने वाली देरी के कारण याचिका को निष्प्रभावी नहीं होने दिया जाएगा. सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की कि “यह वह दौर नहीं है जब एएसजी के आने का इंतजार किया जाए. अदालत किसी एएसजी से भयभीत नहीं है.”


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पीठ ने यह भी कहा कि यह पहला अवसर नहीं है जब सीएआरए के कामकाज को लेकर अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा हो. अदालत के अनुसार, पहले भी ऐसे मामलों में अधिकारियों को न्यायालय के निर्देशों का पालन कराने के लिए दखल देना पड़ा था. अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी.

-भारत एक्सप्रेस



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