सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान नगर निगम सीमा के भीतर राजमार्गो से 1102 शराब की दुकानों को स्थानांतरित करने पर रोक लगा दिया है. अदालत ने उस आदेश पर रोक लगा दिया है, जिसमें राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गो से 500 मीटर के दायरे में स्थित शराब की दुकानों को हटाने या स्थानांतरित करने का राजस्थान हाई कोर्ट के 24 नवंबर 2025 के आदेश दिया था. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह अंतरिम रोक लगाई है.
राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने दलील देते हुए कहा कि हाई कोर्ट ने 500 मीटर की एक कठोर और निरपेक्ष पाबंदी को पुनः लागू कर दिया है. स्टेट ऑफ तमिलनाडु बनाम के बालू मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद स्वयं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है.
किस आधार पर दिया गया था आदेश
हाइवे पर बढ़ती दुर्घटनाओं, शराब की आसान उपलब्धता और सड़क सुरक्षा पर इसके गंभीर प्रभावों को देखते हुए कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि स्टेट और नेशनल हाइवे पर 500 मीटर के दायरे में लगाए गए सभी शराब ठेकों के संचालन पर बड़ा असर पड़ने जा रहा है. अदालत ने यह आदेश दिया था कि राज्य सरकार और आबकारी विभाग को दो महीने की समय-सीमा भी दी थी. जिसके भीतर सभी ठेकों को हटाकर सुरक्षित स्थानों पर रिलोकेट करना अनिवार्य होगा.
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शराब फ्रेंडली कॉरिडोर न्यायसंगत नहीं
हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि नगर सीमाओं का विस्तार सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों को शिथिल करने का आधार नहीं बन सकता और राजमार्गो के समीप शराब की उपलब्धता से कथित रूप से जुड़े बढ़ते सड़क हादसों पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी. कोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा था कि म्युनिसिपल एरिया के वर्गीकरण का दुरुपयोग कर हाइवे को शराब फ्रेंडली कॉरिडोर बनाना न्यायसंगत नहीं है तथा सुप्रीम कोर्ट के के. बालू प्रकरण के आदेशों की अवहेलना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा.
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