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माफियाओं के आगे बेबस क्यों है सरकार? अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी फटकार,सिर्फ FIR से काम नहीं चलेगा, मास्टरमाइंड को दबोचो!

Rajasthan Mining Case: चंबल और राजस्थान में अवैध रेत खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट ने कहा कि माफियाओं पर लगाम कसने के लिए केवल FIR काफी नहीं है, बल्कि उनके ‘सोर्स’ और मास्टरमाइंड तक पहुंचना अनिवार्य हैं 26 मई को इस पर अंतिम फैसला आएगा.

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Edited by Shubhra Rai

Rajasthan Mining Case: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य और राजस्थान में हो रहे अवैध रेत खनन के मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रखा है. कोर्ट 26 मई को मामले में अपना फैसला सुनाएगा. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सिर्फ एफआईआर दर्ज करना काफी नहीं है, अवैध खनन के ‘सोर्स’ और मास्टरमाइंड तक पहुचना जरूरी है.

2022 से निर्देश मौजूद थे

कोर्ट ने राजस्थान सरकार द्वारा आदेशों के पालन में ढिलाई पर सवाल उठाया है. मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी निखिल गोयल ने कोर्ट को बताया कि 2022 से निर्देश मौजूद थे, लेकिन ज्यादा तक मंजूरियां पिछली सुनवाई के बाद दी गई है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि सेंचरी में 40 संवेदनशील पॉइंट चिन्हित किया गया है. 625 एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन उसके बावजूद मुख्य खनन माफिया की पहचान नहीं हो सकी.

वनकर्मियों की सुरक्षा पर चिंता जाहिर की

वही राजस्थान के वन सचिव ने कोर्ट को बताया हाई मास्ट कैमरे लगाए जाएंगे. कोर्ट ने हथियार बंद खनन माफिया के मुकाबले वनकर्मियों की सुरक्षा पर चिंता जाहिर की है. इससे पहले कोर्ट ने बड़ा आदेश पारित किया था. कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करेगी कि अवैध रेत खनन के लिए बार-बार इस्तेमाल किए जाने वाले सभी मार्गों पर वाईफाई और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं.

कोर्ट ने यह भी कहा था कि अधिकारी सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए विस्तृत मूल्यांकन करेंगे. कोर्ट ने कहा था कि कैमरों की लाइव फीड संबंधित जिले के एसपी या सीनियर एसपी और संबंधित वन अधिकारी की निगरानी में रखी जाएगी. कोर्ट ने यह भी कहा था कि अवैध रेत खनन का कोई भी मामला पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को टीम जुटाने सहित त्वरित कार्रवाई शुरू करने का दायित्व होगा.

मशीनों और गाड़ियों में जीपीएस ट्रैकिंग उपकरण

कोर्ट ने कहा था संबंधित अधिकारी प्रायोगिक आधार पर यह सुनिश्चित करेंगे कि खनन गतिविधियों में उपयोग की जाने वाली मशीनों और गाड़ियों में जीपीएस ट्रैकिंग उपकरण लगाए जाएं. ताकि वास्तविक समय में निगरानी और पता लगाने की सुविधा मिल सके. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि यह सब आपकी नाक के नीचे हो रहा है.

हलफनामों में लिखा है कि आपके पास हथियार नहीं हैं, फिर राज्य सरकार का अस्तित्व ही क्यों है? कोर्ट ने कहा था कि यह बहुत अजीब बात है, खनन माफिया जिन खुदाई मशीनों और बुलडोजरों का का इस्तेमाल करते हैं, वे धर्मनिरपेक्ष हैं. वे लोगों की जाति नहीं देखते, इसके विपरीत, हमें यही रुक जाना चाहिए, बेहद दुखद स्थिति है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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