Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

ताहिर हुसैन की अपील पर दिल्ली पुलिस को हाई कोर्ट का नोटिस, 2 दिसंबर को अगली सुनवाई

दिल्ली दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए ताहिर हुसैन की अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस से जवाब मांगा है.

Tahir Hussain Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट ताहिर हुसैन

Edited by Sahil Singh

दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम कदम उठाया है. हाई कोर्ट ने ताहिर हुसैन की ओर से दायर अपील पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी.

ताहिर हुसैन ने कड़कड़डूमा कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. इससे पहले इसी मामले में दोषी ठहराए गए नाजिम और कासिम भी हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं.

निचली अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद

कड़कड़डूमा कोर्ट ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी करार दिया था. अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि यह मामला गंभीर और जघन्य जरूर है, लेकिन इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ यानी सबसे दुर्लभ श्रेणी में नहीं रखा जा सकता. इसी वजह से अदालत ने मौत की सजा देने के बजाय उम्रकैद की सजा सुनाई.

सजा पर बहस के दौरान दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन और अन्य दोषियों के लिए फांसी की मांग की थी. अभियोजन पक्ष ने अंकित शर्मा के साथ हुई बर्बरता का हवाला देते हुए कहा था कि उन्हें बेहद गंभीर चोटें आई थीं. पुलिस के मुताबिक, पोस्टमार्टम में उनके शरीर पर 51 चोटों के निशान मिले थे, जिनमें सात चोटें ऐसी थीं जो जानलेवा हो सकती थीं. इनमें 16 चोटें धारदार हथियार से किए जाने की बात भी सामने आई थी.

ताहिर के वकील ने किया फांसी का विरोध

वहीं, ताहिर हुसैन की ओर से पेश वकील ने मौत की सजा का विरोध किया था. उनका तर्क था कि हर गंभीर अपराध में फांसी नहीं दी जा सकती. बचाव पक्ष ने यह भी कहा था कि मुकदमे के दौरान 91 गवाहों के बयान दर्ज हुए, लेकिन आपराधिक साजिश से जुड़ा पर्याप्त सबूत सामने नहीं आया.

वकील ने दावा किया था कि अंकित शर्मा की हत्या वाली जगह पर ताहिर हुसैन मौजूद नहीं थे और हत्या की साजिश में उनकी भूमिका साबित नहीं हुई. उन्होंने यह भी कहा था कि हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस खुद असफल रही थी, ऐसे में हत्या का पूरा जिम्मेदार किसी एक व्यक्ति को नहीं ठहराया जा सकता.


ये भी पढ़ें: पुलिस के रवैये और ढीली जांच पर इलाहाबाद HC सख्त, लगाई झन्नाटेदार फटकार


अदालत ने ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, अनस और जावेद को आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था. हालांकि, उन्हें आईपीसी की धारा 120B और 129 के तहत आरोपों से बरी कर दिया गया था. अब हाई कोर्ट में दाखिल अपील पर आगे की सुनवाई में निचली अदालत के फैसले और सजा को चुनौती देने वाले ताहिर के तर्कों पर सुनवाई होगी.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital