सुप्रीम कोर्ट से तेलंगाना फोन टैपिंग मामले में तेलंगाना के पूर्व विशेष खुफिया ब्यूरो प्रमुख टी. प्रभाकर राव को बड़ी राहत मिल गई है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन की पीठ ने राव को अग्रिम जमानत तब दिया जब राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में जांच लगभग पूरी हो चुकी है.
वही प्रभाकरण के वकील ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उन्होंने पालन किया है और जांच में सहयोग किया है. राज्य सरकार ने यह भी कहा कि इस मामले में जल्द एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जाएगी.
इससे पहले हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि अग्रिम जमानत के दौरान राव ने इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को नष्ट किया है. एससी मेहता ने जांच में सहयोग नही करने का भी आरोप लगाया था. इसका विरोध करते हुए टी. प्रभाकर राव के वकील कहा था कि यह रूटीन प्रक्रिया है. उन्होंने कहा था कि जो भी एक्सेस या डिलीट किया गया होगा, उसका रिकॉर्ड होगा. मैंने कुछ नही डिलीट किया. इसकी जांच कराई जा सकती है. उन्होंने कोर्ट को बताया था कि राव जांच में लगातार सहयोग कर रहे है.
उन्होंने कहा था कि मुझे 11 बार बुलाया गया 18 घंटे पूछताछ हुई, जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी है. इससे साबित होता है कि मैंने सहयोग किया है.
निलंबित एसआईबी डीएसपी भी जांच के घेरे में
बता दें कि हैदराबाद के निचली अदालत ने 22 मई को राव के खिलाफ एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था. आदेश में कहा गया था कि यदि राव 20 जून तक अदालत में पेश नही होते हैं तो उन्हें भगोड़ा घोषित किया जा सकता है. एसआईबी के निलंबित डीएसपी समेत चार पुलिस अधिकारियों को हैदराबाद पुलिस ने मार्च 2024 में गिरफ्तार किया था. इन पर विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से खुफिया जानकारी मिटाने और पिछली बीआरएस सरकार के दौरान फोन टैपिंग का आरोप है.
बाद में इन्हें जमानत मिल गई थी. पुलिस के अनुसार आरोपी एक षडयंत्र का हिस्सा थे, जिसमें उन्होंने एसआईबी की संसाधनों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग किया.
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-भारत एक्सप्रेस
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